Wednesday, September 10, 2025

आवारा गौवंश और हमारी ज़िम्मेदारी


नित्य संदेश। आजकल हम सबने अपनी कॉलोनियों और गलियों में यह दृश्य अक्सर देखा होगा कि कई गाय-बैल यहाँ-वहाँ भटकते रहते हैं। भूख की तलाश में ये निर्दोष प्राणी कूड़े-कचरे में मुँह मारते हैं और अनजाने में पॉलिथीन, टूटी काँच की बोतलें तथा हानिकारक वस्तुएँ खा लेते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वे बीमार हो जाते हैं और असमय मृत्यु का शिकार भी बन सकते हैं।


यह हमारे समाज और इंसानियत पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब हम अपने घरों में स्वादिष्ट और ताज़ा भोजन करते हैं, तो क्या इन मासूम प्राणियों के लिए हमारे पास थोड़ा-सा बचा हुआ खाना या छिलके भी नहीं हो सकते? हमने Cyclomed Fit India के अंतर्गत एक छोटा-सा प्रयास शुरू किया है। प्रतिदिन सुबह और शाम को हम सब्ज़ियों और फलों के छिलके, बची हुई रोटियाँ एकत्रित करते हैं और मोहल्ले के एक स्थान पर रख देते हैं। वहाँ गाय-बैल आते हैं और संतोषपूर्वक ताज़ा भोजन ग्रहण करते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल जानवरों को पौष्टिक आहार मिलता है, बल्कि हमारे घरों में कचरे का ढेर नहीं लगता, दुर्गंध नहीं फैलती और स्वच्छता भी बनी रहती है।

यह पहल किसी एक व्यक्ति की नहीं हो सकती। यदि हर नागरिक अपने-अपने घरों से इस तरह का योगदान देना शुरू करे, तो न तो गायों को कूड़े में मुँह मारना पड़ेगा और न ही हमारी कॉलोनियाँ गंदगी और दुर्गंध से प्रभावित होंगी। यह केवल दया या करुणा का कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और पर्यावरण दोनों के प्रति हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है।

आइए, हम सब मिलकर इस छोटे-से प्रयास को एक बड़ा आंदोलन बनाएँ। हर घर से निकलने वाला थोड़ा-सा शुद्ध भोजन इन गौवंश के लिए जीवन का सहारा बन सकता है। हृदय से विनम्र आग्रह है कि सभी नागरिक इस प्रथा को अपनाएँ और इन बेजुबान प्राणियों को भी अपनाएँ।

प्रस्तुति
डॉ. अनिल नौसरान


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