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लक्ष्मी का हो आगमन,
प्रफुल्लित तन-मन,
गणेश, शारदे, विष्णु,
कुबेर दातार हो।
अष्टलक्ष्मी हो प्रसन्न,
शुभ, लाभ से सम्पन्न,
धनवान बने सब,
मां का उपकार हो।
रंगोली, व्यंजन भाए,
नववस्त्र स्व सुहाए,
पटाखों से सजे व्योम,
सुस्वप्न साकार हो।
झिलमिल दीपावली,
चमकीली गली-गली,
सबसे सुंदर पर्व,
प्रदीप्त संसार हो।
सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'
इंदौर (म.प्र.)
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