Thursday, October 8, 2026

एआई के दौर में नई उड़ान की तैयारी, सुभारती के विद्यार्थियों ने सीखे जनरेटिव एआई के गुर


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ने की पहल के तहत स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग द्वारा  ‘जेनरेटिव एआई’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गीकोनिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Geekonik Solutions Pvt. Ltd.) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और विभिन्न क्षेत्रों में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना रहा।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन प्रो. (डॉ.) रविन्द्र कुमार जैन, डीन, केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस, डॉ. शशिराज तेवतिया, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग तथा कार्यक्रम के विशेषज्ञ वक्ताओं ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी में जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बड़े भाषा मॉडल, एआई आधारित टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई आधारित कंटेंट एवं चित्र निर्माण, अनुसंधान तथा सॉफ्टवेयर विकास में जनरेटिव एआई की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।


कार्यक्रम के विशेषज्ञ वक्ता श्री आशु खेरा एवं श्री उत्तम ने विद्यार्थियों को जनरेटिव एआई की तकनीकी बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि जनरेटिव एआई अब केवल टेक्स्ट या सामग्री तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान, प्रोग्रामिंग, डेटा विश्लेषण, समस्या समाधान, नवाचार और उद्योग की कार्यप्रणाली में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। विशेषज्ञों ने विभिन्न एआई टूल्स के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया। उदाहरणों के जरिए समझाया गया कि सही तरीके से तैयार किया गया प्रॉम्प्ट एआई से बेहतर और अधिक उपयोगी परिणाम प्राप्त करने में किस प्रकार मदद करता है। विद्यार्थियों को एआई टूल्स के जिम्मेदारी पूर्ण एवं प्रभावी उपयोग के साथ-साथ उनकी सीमाओं और सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।


डॉ. शशिराज तेवतिया ने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जनरेटिव एआई का ज्ञान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी एवं सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें नवीनतम तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से भी जोड़ना है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं और उद्योग की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञ वक्ताओं से जनरेटिव एआई से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम ज्ञानवर्धक होने के साथ ही संवादात्मक भी बना। कार्यक्रम का संचालन छात्रा सिमरन ने किया। इस अवसर पर कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के डॉ. नवीन चंद्र, डॉ. सोनम तोमर, डॉ. अंकित कुमार, श्री कृष्ण पाल सिंह, श्री मुकुल शर्मा, श्री संजीव पंवार, डॉ. संदीप कुमार एवं श्री दक्ष भारद्वाज सहित विभाग के अन्य शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अंकित कुमार ने विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी विद्यार्थियों में तकनीकी जागरूकता, नवाचार, अनुसंधान की रुचि और रोजगारपरक दक्षताओं को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को जनरेटिव एआई की व्यापक संभावनाओं को समझने और इसे अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास में प्रभावी ढंग से उपयोग करने का अवसर मिला।

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