Sunday, October 4, 2026

सामवेद की दशमी कथा का सप्तम दिवस पूर्ण


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। ब्रजघाट पर गंगा के मध्य में सामवेद की दशमी कथा के सातवें दिन कथाव्यास पारुल मित्तल ने नवम प्रपाठक की समापन कथा सुनाई।

उन्होंने बताया कि इस भाग में ऋषियों ने इन्द्र के बाहुबल की प्रशंसा करते हुए शत्रुओं से रक्षा की प्रार्थना की है। पारुल मित्तल ने 'भद्रं कर्णेभि:' और 'स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:' मंत्रों की व्याख्या कर लौकिक जीवन में इनकी महत्ता बताई। मंजीरे और तालियों के साथ सामवेद की महिमा का गान हुआ।

पूनम लखनपाल ने त्रिपाठी जी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। सभी ने पितृगण के लिए तर्पण किया। इसके साथ ही सामवेद की दस कथाओं का पारायण पूर्ण हुआ।

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