Friday, October 9, 2026

कांशीराम शोध पीठ को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के कुलपति ने दिए निर्देश


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मान्यवर कांशीराम शोध पीठ के तत्वावधान में मान्यवर कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को विश्वविद्यालय के अटल सभागार में ‘मान्यवर कांशीराम जी का सामाजिक चिंतन एवं सामाजिक न्याय : समकालीन भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन कर कांशीराम जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई । 

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। गोष्ठी में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, निदेशकों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में मान्यवर कांशीराम जी के सामाजिक, राजनीतिक एवं वैचारिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने अपने जीवन को सामाजिक परिवर्तन, समानता, अधिकारों के प्रति जागरूकता तथा वंचित वर्गों के सामाजिक एवं राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए समर्पित किया। उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक भागीदारी और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी के विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखकर उन्हें अध्ययन, अनुसंधान और अकादमिक विमर्श के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुँचाना आवश्यक है। शिक्षा सामाजिक जागरूकता, समान अवसरों और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए उनमें समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करें।

कुलपति ने मान्यवर कांशीराम शोध पीठ के कार्यों में तेजी लाने तथा उसे राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के लिए शोध पीठ के निदेशक प्रो. दिनेश कुमार को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने शोध पीठ की गतिविधियों को व्यापक स्वरूप देने, शोध एवं अकादमिक कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने तथा मान्यवर कांशीराम जी के विचारों के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने पर बल दिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी , डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. पूनम शर्मा, प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, प्रो. बीरपाल सिंह, डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी, डॉ. निवेदिता कुमारी, डॉ. नीरज सिंघल, डॉ. सतीश प्रकाश, डॉ. राजीव कौशिक तथा डॉ. विवेक त्यागी उपस्थित रहे । अतिथियों ने अपने विचारों के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा, सामाजिक चेतना और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया। डॉ. रवि प्रकाश ने सामाजिक परिवर्तन के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। 

डॉ. पूनम शर्मा ने सामाजिक न्याय की स्थापना में शिक्षा और समान अवसरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक असमानताओं को समझने और उन्हें दूर करने की दिशा में प्रभावी माध्यम है। डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी ने मान्यवर कांशीराम जी के संघर्ष और सामाजिक चेतना के प्रसार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता ने सामाजिक चिंतन के अकादमिक अध्ययन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विचारों का गंभीर अध्ययन समाज की चुनौतियों को समझने में सहायक होता है। 
प्रो. बीरपाल सिंह ने समानता, अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी को सामाजिक न्याय के महत्वपूर्ण आधार बताते हुए समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी ने सामाजिक न्याय को लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और अधिकार प्राप्त होना आवश्यक है। डॉ. निवेदिता कुमारी ने सामाजिक सशक्तीकरण में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समावेशी समाज के निर्माण के लिए भेदभाव से मुक्त वातावरण आवश्यक है। 

डॉ. नीरज सिंघल ने मान्यवर कांशीराम जी के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक असमानताओं के समाधान के लिए जागरूकता और वैचारिक संवाद को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. सतीश प्रकाश ने सामाजिक परिवर्तन में संगठन, सामूहिक चेतना और निरंतर प्रयासों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। डॉ. राजीव कौशिक ने संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक अधिकारों और समान अवसरों के प्रति जागरूकता को समतामूलक समाज के निर्माण के लिए आवश्यक बताया। 

डॉ. विवेक त्यागी ने विद्यार्थियों को सामाजिक विचारकों के जीवन और साहित्य का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सामाजिक विषयों के प्रति जागरूकता सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वक्ताओं के विचारों का केंद्रीय संदेश यह रहा कि सामाजिक न्याय केवल अधिकारों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, समान अवसरों, शिक्षा, सामाजिक भागीदारी और भेदभाव से मुक्त वातावरण की स्थापना से है।

मान्यवर कांशीराम शोध पीठ के निदेशक प्रो. दिनेश कुमार ने शोध पीठ के उद्देश्यों, गतिविधियों तथा भावी कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शोध पीठ का प्रमुख उद्देश्य मान्यवर कांशीराम जी के जीवन, विचारों, सामाजिक चिंतन और योगदान का अध्ययन एवं अनुसंधान के माध्यम से व्यापक प्रसार करना है।

उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने अपने जीवन के माध्यम से संगठन की शक्ति, निरंतर संघर्ष, वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक प्रतिबद्धता का महत्व स्थापित किया। उनके विचारों का गंभीर अध्ययन नई पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करने में सहायक हो सकता है।

प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि शोध पीठ भविष्य में शोध, विचार गोष्ठियों, व्याख्यानों, संगोष्ठियों तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से मान्यवर कांशीराम जी के विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का प्रयास करेगी। उन्होंने शोध पीठ की गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए कुलपति द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चार व्यक्तियों—पुजेश लोहरे , नरेश वेद , सतीश शर्मा एवं शैली चौधरी—को मान्यवर कांशीराम शोध पीठ की ओर से कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समाज के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने वाले व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित करने तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डॉ विजेता गौतम , डॉ अंशु अग्रवाल , ई विजय कुमार राम , डॉ नेहा गर्ग , डॉ मुनेश कुमार , डॉ योगेंद्र गौतम का विशेष सहयोग रहा l इसके अतिरिक्त डॉ दुष्यंत चौहान , डॉ. वाई. पी. सिंह, डॉ. सुदेशना, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी , डॉ. मनोज जाटव , राहुल कुमार , रॉबिन सिंह सहित अन्य सहयोगियों का कार्यक्रम के आयोजन में विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। आयोजन के माध्यम से मान्यवर कांशीराम जी के विचारों को अकादमिक विमर्श से जोड़ने, सामाजिक न्याय की अवधारणा को व्यापक रूप से समझने तथा उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

अंत में कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी विशिष्ट अतिथियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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