नित्य संदेश
जब तुम आना मृत्यु...
मैं जानता हूं तुम आओगी एक दिन,
और यही अंतिम सत्य होगा।
लेकिन कोई शोर न करना,
तुम्हें चुपके से आना होगा।।
कभी न कि शिकायत जिंदगी से,
तुम्हें भी सहर्ष स्वीकार्य करूंगा।
तुम जब आओगी मिलने मुझसे,
वादा है न मै पीछे हटूंगा।।
तुम मृत्यु हो... अन्त नहीं,
इस बात को मैं जानता हूं।
कोई नहीं है अपना जगत में,
बस तुम्हें अपना मानता हूं।।
जिंदगी में क्या मिला पता नहीं,
लेकिन किरदार शिद्दत से निभाया है।
तुम आओ तो ऐसे आना,
जैसे सब पा कर फिर तुम्हें पाया है।।
रहे याद ये मिलन हमारा,
मंजर कुछ ऐसा कर देना।
सांसे हो आखिरी जब मेरी,
मुस्कान होंठों पर भर देना।।
रोया नहीं मैं खुद कभी,
न आखिर में किसी को रोने दूंगा।
हे मृत्यु तुम आना बड़ी खामोशी से,
बस मैं संग तुम्हारे चल दूंगा।।
—रविंद्र तंवर "सूर्योदय"


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