Friday, October 2, 2026

सामवेद की दशमी कथा का पंचम दिवस : सूर्य, इन्द्र, अग्नि, जल और वायु की कथा


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। विक्टोरिया गार्डन स्थित निज निवास पर चल रही सामवेद की दशमी कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पारुल मित्तल ने सामवेद के नवम प्रपाठक में सूर्य, इन्द्र, अग्नि, जल और वायु की कथा सुनाई।

कथा का शुभारंभ सभी देवताओं को नमस्कार कर किया गया। पारुल मित्तल ने कहा कि वैदिक वाणी पवित्र शक्ति है, वह शुद्ध और कल्याणकारी है। उन्होंने कहा कि सूर्य प्रकाश का परम स्रोत है, वह अनेक देवताओं के तेज का मिश्रण है। सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य की किरणें हमें पापों और संकटों से बचाएं। अग्नि का दिव्य रूप हमारे जीवन में प्रकाश उत्पन्न करे और हमें सांसारिक व आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करे।

उन्होंने कहा कि इन्द्र धन के स्वामी हैं। हमारी श्रेष्ठ स्तुतियां इन्द्र तक पहुंचें और इन्द्र के धन में हमारी भागीदारी हो। जल जीवनदायिनी शक्ति है, जल पोषक है। वायु हमारे शरीर का प्राण है, वह हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को प्रसन्न रखे।

कथाव्यास ने कहा कि इनकी स्तुति के माध्यम से ऋषियों ने आधुनिक जीवन के लिए संदेश दिया है कि प्रकृति का संरक्षण एवं सम्मान करें। इन प्रार्थनाओं में प्रदूषण की समस्याओं का निराकरण निहित है।

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