Friday, October 9, 2026

सर छोटूराम इंजीनियरिंग संस्थान में ‘रोबो आरोहण’ कार्यशाला का शुभारंभ, नवाचार के लिए 10 लाख रुपये से अधिक के पुरस्कारों की घोषणा



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटूराम अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में रोबोटिकी के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और व्यावहारिक तकनीकी कौशल विकसित करने के उद्देश्य से ‘रोबो आरोहण’ सहपाठी-अधिगम कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उत्कृष्ट नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपये से अधिक के पुरस्कारों की घोषणा की गई।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करना, करियर बनाना और पैसा कमाना अच्छी बात है, लेकिन प्रत्येक विद्यार्थी को यह भी चिंतन करना चाहिए कि वह अपने ज्ञान और प्रतिभा से देश एवं समाज के लिए क्या कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी आवश्यक है। तकनीक की सार्थकता तभी है, जब उसका उपयोग मानवता की सेवा और देश की समस्याओं के समाधान में हो। इजराइल का उदाहरण देते हुए पदम सिंह ने कहा कि वहां पात्र युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। उन्होंने इजराइल के लोगों की अपनी मातृभूमि के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता से पहले भी दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले यहूदियों के बीच अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि में लौटने और उसे स्थापित करने की आकांक्षा रही। वर्ष 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद देश के विकास और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जापान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमलों की त्रासदी के बाद भी जापान ने अनुशासन, परिश्रम, शिक्षा और तकनीकी नवाचार के बल पर उल्लेखनीय प्रगति की। आज जापान रोबोटिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान रखता है। पदम सिंह ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ऐसी रोबोटिक तकनीक विकसित करने के बारे में सोचें, जो सीमाओं की निगरानी, सुरक्षा बलों की सहायता, यातायात प्रबंधन तथा आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोगी हो। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनना नहीं, बल्कि अपनी दक्षता को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ना भी होना चाहिए।



कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करना, अच्छी नौकरी हासिल करना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन के महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं, लेकिन इन लक्ष्यों की पूर्ति के साथ देश और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम जो भी कार्य करें, उसमें राष्ट्रहित और समाजहित का भाव सर्वोपरि होना चाहिए। हमारी शिक्षा, हमारा ज्ञान और हमारी तकनीकी दक्षता केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहे, बल्कि उससे देश की प्रगति और आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आना चाहिए। कुलपति ने कहा कि आज का युग विज्ञान, तकनीक और नवाचार का युग है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय प्रयोग करने, नए विचार विकसित करने और वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए आगे आना चाहिए। किसी भी देश की प्रगति उसके युवाओं की सोच, रचनात्मकता और कार्यक्षमता पर निर्भर करती है। यदि युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश की आवश्यकताओं को समझने और उनका समाधान खोजने में करें, तो भारत तकनीकी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। प्रो. शुक्ला ने कहा कि रोबोटिकी जैसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता में बदलने का अवसर प्रदान करती हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से विद्यार्थी आपसी सहयोग से सीखते हैं, समस्याओं का विश्लेषण करते हैं और सामूहिक रूप से समाधान विकसित करना सीखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे ऐसे रोबोट और तकनीकी उपकरण विकसित करें, जो चिकित्सा, कृषि, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण, यातायात प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध हों। विशेष रूप से ऐसी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है, जो कठिन एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने वाले सुरक्षाकर्मियों की सहायता कर सके और मानव जीवन को अधिक सुरक्षित बना सके। 


कुलपति ने कहा कि नवाचार का वास्तविक मूल्य केवल किसी नई मशीन या तकनीक के निर्माण में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वह समाज की किस समस्या का समाधान करती है और लोगों के जीवन को कितना बेहतर बनाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी उपलब्धियों के साथ सामाजिक संवेदनशीलता, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को भी बनाए रखें। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल उपाधि प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व को विकसित करने का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘रोबो आरोहण’ कार्यशाला विद्यार्थियों में नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी और उन्हें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी प्रतिभा, ज्ञान और परिश्रम को राष्ट्र की आवश्यकताओं से जोड़ते हैं, तभी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं उद्योगपति अजय गुप्ता ने उत्कृष्ट नवाचारों के लिए चार लाख, डेढ़ लाख और एक लाख रुपये के तीन पुरस्कारों की घोषणा की। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने भी पांच लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त पुरस्कार राशि की घोषणा की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, प्रो. बीरपाल सिंह, संस्थान के निदेशक प्रो. नीरज सिंघल, कार्यक्रम संयोजक डॉ. शिवम गोयल, डॉ. विवेक कुमार तथा प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पोलैंड स्थित पोजनॉन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़े अभियंता अर्पित जून का वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया गया। इसमें उनके रोबोटिकी संबंधी अनुभवों ने विद्यार्थियों को प्रयोग करने और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं वंदे मातरम् के साथ हुआ।

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