नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ के न्यूरोलॉजी विभाग में 26 वर्षीय महिला मरीज गजाला, निवासी गढ़मुक्तेश्वर के मायस्थेनिया ग्रेविस बीमारी का सफल इलाज किया गया।
मरीज को लंबे समय से निगलने में परेशानी, आवाज में नाक से बोलने जैसी आवाज (Nasal Twang) और बोलने के तरीके में बदलाव की शिकायत थी। इसके लिए उसने कई निजी अस्पतालों में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और ईएनटी विशेषज्ञों से परामर्श लिया। आवाज में बदलाव के चलते उसका डीएनएस (नाक की हड्डी टेढ़ी) का ऑपरेशन भी किया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। लगातार समस्या बनी रहने पर मरीज ने मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग में संपर्क किया। विभाग में भर्ती कर विस्तृत जांच की गई। न्यूरोमस्कुलर बीमारी की आशंका पर Repetitive Nerve Stimulation Test (RNST) सहित कई जांचें कराई गईं। यह जांच बाहर लगभग 15 हजार रुपये में होती है, जबकि मेडिकल कॉलेज में काफी कम खर्च में उपलब्ध हुई।
जांच में मायस्थेनिया ग्रेविस की पुष्टि हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका सागर के मार्गदर्शन में उपचार शुरू किया गया। उपचार के 24 घंटे के भीतर ही मरीज की स्थिति में सुधार दिखने लगा और तीन दिन में उसे छुट्टी दे दी गई। उसे नियमित फॉलोअप की सलाह दी गई है। डॉ. दीपिका सागर ने बताया कि लंबे समय तक निगलने और बोलने में परेशानी होने तथा अन्य विशेषज्ञों से इलाज के बाद भी आराम न मिलने पर न्यूरोलॉजिकल कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए। मायस्थेनिया ग्रेविस की समय पर पहचान और सही उपचार से मरीज को जल्दी राहत मिल सकती है। मेडिकल कॉलेज में आधुनिक जांच और विशेषज्ञ उपचार कम खर्च में उपलब्ध है।

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