Tuesday, September 29, 2026

सामवेद की दशमी कथा का द्वितीय दिवस संपन्न

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। विक्टोरिया गार्डन स्थित निज निवास 11 जी में चल रही सामवेद की दशमी कथा के द्वितीय दिवस पर कथाव्यास पारुल मित्तल ने सामवेद के नवम प्रपाठक - "उप नो हरिभि: सुतम्" की कथा का वाचन किया।


पारुल मित्तल ने बताया कि अग्नि मनुष्य और देवताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो मनुष्यों के हव्यों को देवताओं तक पहुंचाते हैं। अग्नि यज्ञ के आधार और ऊर्ध्वगामी हैं। उनकी तीन महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं - हव्यवाहक, मार्गदर्शक और शक्ति के स्रोत। इन्द्र शक्ति, साहस, पराक्रम और नेतृत्व के प्रतीक हैं, जो हरे घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर वृत्र का वध कर जलधाराओं को मुक्त कराते हैं। वृत्रहन्ता का प्रतीक है कि बाधाओं से डरने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। शतक्रतु सिखाते हैं कि श्रद्धा, शुद्धता और समर्पण से किया गया कार्य उत्तम फल देता है।



वरुण अर्थात जल जीवन की मूल शक्ति है। वैदिक मंत्रों का संदेश है कि जल का दुरुपयोग न करें, जल संरक्षण करें और नदियों की स्वच्छता का ध्यान रखें। मधुर गान के साथ कथा का सुंदर वाचन हुआ। इस अवसर पर मंत्रोच्चारण भी किया गया -

अग्निरिन्द्राय पर्वते दिवि शुक्रो विराजते। महिषीव वि जायते भ्राजमानः।।

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