Wednesday, September 16, 2026

छात्रों की गूंज : न ढोल-नगाड़े, न हार-फूल... जींस-टीशर्ट में युवाओं के बीच पहुंच रहे कांग्रेसी; नुक्कड़ नाटक, गिटार-डांस से बुलावा

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। लंबे भाषणों, फूलमालाओं और औपचारिक मंचों से आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने 'जेन-जी' के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए प्रचार का तरीका बदल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के प्रचार के लिए कांग्रेस नेता अब स्थानीय कैफे-रेस्तरांओं का रुख कर रहे हैं, युवाओं के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं और विद्यार्थियों व स्थानीय बैंड के साथ 'जैमिंग' (साथ मिलकर अनौपचारिक रूप से गाना-बजाना) कर रहे हैं।


1997-2012 के बीच की पीढ़ी को टारगेट

इंदौर में राहुल गांधी के 19 सितंबर के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने प्रचार का तरीका बदल दिया है। इस बार न ढोल-नगाड़े हैं, न नेताओं के स्वागत में हार-फूल और बड़े मंच।


कांग्रेस नेता जींस-टीशर्ट पहनकर युवाओं के बीच पहुंच रहे हैं। कहीं गिटार पर गाने हो रहे हैं, कहीं डांस और नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों से संवाद किया जा रहा है। इसी माहौल के बीच युवाओं को 19 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है।


नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने जेन-जी तक पहुंचने के लिए प्रचार का अलग तरीका अपनाया है। पार्टी का जोर बड़े राजनीतिक आयोजनों और भाषणों के बजाय युवाओं के बीच जाकर उनसे सीधे संवाद करने पूड है। इसके लिए करने पर है। इसके लिए संगीत, कला, खेल और नुक्कड़ नाटक को प्रचार का हिस्सा बनाया गया है।


गिटार, गाने और डांस के बीच कार्यक्रम का न्योता

कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता युवा कलाकारों के साथ कॉलेज, हॉस्टल और अन्य स्थानों पर पहुंच रहे हैं। कलाकार गिटार लेकर गाने गाते हैं, डांस करते हैं और नुक्कड़ नाटक के जरिए युवाओं से जुड़े मुद्दे सामने रखते हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता युवाओं से बातचीत कर उन्हें 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में आने का न्योता देते हैं।


यानी इस प्रचार में पहले संवाद और मनोरंजन है, उसके बाद राजनीति। कांग्रेस की कोशिश है कि युवाओं को पारंपरिक राजनीतिक सभा में बुलाने के बजाय उनके बीच जाकर सहज माहौल में कार्यक्रम से जोड़ा जाए। इस अभियान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आरही हैं।


मैदान में छात्रों ने खुद लिखा-छात्रों की गूंज

अभियान के दौरान स्कूल विद्यार्थियों के बीच भी अलग दृश्य देखने को मिला। विद्यार्थियों ने मैदान में 'छात्रों की गूंज' लिखकर कार्यक्रम के प्रति अपना उत्साह जताया। कांग्रेस इसे युवाओं के बीच अभियान को मिल रही प्रतिक्रिया के तौर पर देख रही है।



राजनीति के प्रचार में पहली बार ऐसा प्रयोग

आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के प्रचार में रैली, बैनर, पोस्टर, ढोल-नगाड़े और नेताओं के औपचारिक दौरे दिखाई देते हैं। इसके उलट 'छात्रों की गूंज' के प्रचार में संगीत, नुक्कड़ नाटक, खेल और अनौपचारिक पहनावे को जगह दी गई है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जेन-जी तक पहुंचने के लिए उनके बीच जाकर उनकी भाषा और उनके पसंदीदा माध्यमों से संवाद करना ज्यादा प्रभावी है।


'जेन-जी (जेनरेशन जेड) से तात्पर्य उस पीढ़ी से है, जिसका जन्म मुख्य रूप से वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है। मध्यप्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में हुए छात्र आंदोलन के बाद नयी पीढ़ी के मुद्दों, खासकर शिक्षा और परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज है।

जिंस और टी-शर्ट में नजर आ रहे

आम तौर पर कुर्ता-पायजामा पहने नजर आने वाले स्थानीय कांग्रेस नेता 'छात्रों की गूंज' के पंजीयन अभियान के दौरान युवाओं के बीच जींस और टी-शर्ट में नजर आ रहे हैं। इंदौर जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने कहा कि ज्यादातर युवाओं को राजनेताओं के लंबे भाषण और फूलमालाओं से स्वागत जैसी औपचारिकताएं पसंद नहीं हैं और वे इनमें रुचि नहीं लेते। वानखेड़े, एनएसयूआई की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं।


जैमिंग सत्रों में गाना-बजाना कर रहे

उन्होंने कहा कि पहले जब हम महाविद्यालयों में कार्यक्रम करते थे, तो भाषण होता था और मंच का औपचारिक कार्यक्रम होता था। आज हम महाविद्यालयों में 'जैमिंग' सत्रों के दौरान विद्यार्थियों के साथ गाना-बजाना कर रहे हैं। यह एक बड़ा फर्क है। वानखेड़े ने बताया कि 'छात्रों की गूंज' के प्रचार के लिए क्रिकेट टूर्नामेंट कराए जा रहे हैं और पुस्तकालयों व छात्रावासों में बैठकें भी की जा रही हैं।


युवाओं की सोच है अलग

उन्होंने कहा कि नेताओं और राजनीति को लेकर आज के युवाओं की सोच पहले की पीढ़ी से एकदम अलग है। आज का युवा वही बात मानता है, जैसा वह खुद महसूस करता है। उसे इसकी ज्यादा परवाह नहीं होती कि उसका विचार किसी को अच्छा लग रहा है या बुरा।

खोई जमीन हासिल करने की कोशिश

अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए कांग्रेस खासकर 30 साल से कम उम्र के लोगों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। जाहिर है कि इसके लिए उसे युवाओं के बीच प्रचार के तौर-तरीके बदलने पड़े हैं।

No comments:

Post a Comment