Friday, September 18, 2026

रायगढ़ घराने की बंदिशों में छिपे सौंदर्य से रूबरू हुए सुभारती के विद्यार्थी

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय के मंच कला विभाग की ओर से तक “रायगढ़ घराने की बंदिशों में सौंदर्य” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय वैल्यू एडेड कोर्स का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं राज्य शिखर सम्मान से सम्मानित प्रो. (डॉ.) विजया शर्मा ने विद्यार्थियों को रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा, कथक की तकनीक, अभिनय और विभिन्न बंदिशों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।



कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने दीप ज्योति श्लोक प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं कलात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) विजया शर्मा को स्मृति चिह्न, पौधा एवं पटका भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ललित कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा, विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर, संकाय के शिक्षक गण तथा मंच कला विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

व्याख्यान में प्रो. (डॉ.) विजया शर्मा ने रायगढ़ घराने के इतिहास और उसकी विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रायगढ़ घराने के प्रवर्तक महाराजा चक्रधर सिंह स्वयं सिद्ध साहित्यकार एवं संगीतज्ञ थे। उनकी रचनाओं और बंदिशों में संस्कृत, ब्रज एवं उर्दू का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उनकी बंदिशों में काव्य-सौंदर्य, लय-सौंदर्य और भाव-सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कथक की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देते हुए तत्कार, तोड़े, टुकड़े और परण आदि का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ अभ्यास करते हुए कथक की बारीकियों को समझा।



प्रो. (डॉ.) विजया शर्मा ने विद्यार्थियों को ठुमरी के विभिन्न प्रकारों और उनकी प्रस्तुति शैली से परिचित कराया। उन्होंने भाव, अभिव्यक्ति और अभिनय के माध्यम से कथक प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने के गुर सिखाए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. के. मित्तल ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि कला की समृद्ध परंपराओं से विद्यार्थियों को जोड़ने वाले ऐसे आयोजन भविष्य में भी निरंतर होते रहने चाहिए।



मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने भी आयोजन की सराहना करते हुए इसे  विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक पहल बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। रायगढ़ घराने की बंदिशों और कथक की बारीकियों से विद्यार्थियों को परिचित कराने वाला यह आयोजन उनके ज्ञान, रचनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति को नई दिशा देने वाला है। साथ ही विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अनुभवी एवं प्रतिष्ठित कलाकारों से प्रत्यक्ष सीखने के अवसर भी मिलें, जिससे उनकी प्रतिभा को व्यापक मंच मिल सके।

 


कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. रक्षा सिंह डेविड ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. श्वेता चौधरी, निशि चौहान, श्वेता सिंह, डॉ. दीपक सिंह, डॉ. अमृता जोशी, डॉ. प्रियंका ठाकुर, श्री अभिषेक मिश्रा, फरदीन हुसैन एवं मेहराज खान सहित सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।


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