Friday, September 25, 2026

विश्वात्मा — मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई

नित्य संदेश

विश्वात्मा 

बॉंधे जाते हैं मन्नतों के धागे,

इस आस में रुका सौभाग्य जागे,

करुण प्रार्थनाएं परमेश्वर सुन ले,

लाखों की भीड़ में हमें बस वो चुन लें ।


तकनीकी रास्ते बंद जहॉं हो जाते,

याचक मुराद ले प्रभु के द्वार भागते,

अपराधों की क्षमा याचना कर प्रभु से,

 होते हल्के चिंताओं के पहाड़ से ।


पीपल नीम कभी वट को सूत बॉंधतें,

गहरा विश्वास जगा मन्नतें मॉंगतें,

अशांत मन ताकि थोड़ा सुकून पा सके,

अतृप्त इच्छाशक्ति सजग हो जाग सके ।


तजकर अवसाद नया संबंध जोड़ते,

आस की दीप्ति से संशय बॉंध तोड़ते, 

रमें कोशिशों में ये धागा बस दमकें,

फरियाद शीघ्र फलीभूत होकर चमकें ।


ये अटल विश्वास पुष्पित करता फल को,

धागा ये खुशियों से भर देता कल को,

रूकावट मन की है हम यह जानें तो,

 "आनंद" यहीं है भीतर पहचानें तो ।


अनंत भंडार यहॉं लगती कमी हमें,

खोजते चाहतों को हम इसमें उसमें, 

गहरा हो जब रिश्ता अंतर्रात्मा से,

अंकुरित तेज होता है विश्वात्मा से ।



- मोनिका डागा “आनंद"

चेन्नई

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