Tuesday, September 15, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में युवा विद्यार्थी संवाद संगोष्ठी, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सत्यजीत रे ऑडिटोरियम में ‘युवा विद्यार्थी संवाद संगोष्ठी’ का आयोजन ‘राष्ट्रोत्थान में युवाओं की भूमिका’ विषय पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, व्यक्तित्व विकास और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता अनिल, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ; विनोद भारतीय जी, सह विभाग संघचालक, मेरठ; सत्यबंधु जी, महानगर सह संघ चालक; कविंद्र जी, केंद्र एवं महानगर प्रचारक, मेरठ पश्चिम महानगर; तथा अंकुश कुमार जी, महानगर सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में सुभारती विश्वविद्यालय के सम-कुलाधिपति मेजर जनरल (डॉ.) जी.के. थपलियाल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करें तो वे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
मुख्य वक्ता अनिल, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मेरठ प्रांत ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा के मन में यह भाव होना चाहिए कि “राष्ट्र ही सर्वोपरि है और मैं भी उसी राष्ट्र का एक अंश हूं।” उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के व्यापक हितों के बारे में सोचते हैं, तभी उनके जीवन की सार्थकता बढ़ती है। उन्होंने युवाओं से देश की संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत को समझते हुए आधुनिक ज्ञान एवं तकनीक के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संकल्प, स्वावलंबन और सेवा भावना से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। युवाओं को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर उसकी प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम करना चाहिए। आत्मनिर्भर युवा ही आत्मनिर्भर समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव रख सकते हैं। 

अनिल ने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा सच्चे विद्यार्थी के जीवन का मार्ग हैं। केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान को अच्छे आचरण, चरित्र निर्माण और कर्तव्य के प्रति निष्ठा से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, अनुशासन, समयबद्धता और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता ने युवाओं की एकता और संगठन की शक्ति पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठित युवा ही समृद्ध और सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं। युवा शक्ति यदि सकारात्मक उद्देश्य के लिए संगठित होकर कार्य करे तो सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के साथ भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वच्छता तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. (डॉ.) मनोज कपिल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति सिंह ने किया।इस अवसर पर डॉ. पिंटू मिश्रा, कर्नल राजेश त्यागी, डॉ. मुकेश रुहेला, डॉ. श्रवण कुमार , डॉ. शशिराज तेवतिया, डॉ. श्वेता भारद्वाज, डॉ. रविंद्र कुमार जैन, डॉ. सौकिंद्र कुमार, डॉ. इंद्रनील बोस, डॉ. रेणु, समीर सिंह, इंजीनियर अजय, डॉ. हिमांशु, डॉ. आशुतोष सहित शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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