Friday, September 4, 2026

मंदिर में प्रात: प्रारंभ हुए अभिषेक अनुष्ठान, सायंकाल होते ही छाएगा उत्साह, आधी रात गूंजेगा... नंद के घर आनंद भयो

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। आज सुबह से शुरू हुई रिमझिम बारिश के साथ जन्माष्टमी पर्व के तहत शहर के मंदिरों में श्रीकृष्ण प्रतिमाओं के अभिषेक-अनुष्ठानों का सिलसिला प्रारंभहुआ। भगवान को नवीन परिधान धारण कराकर फूलों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। आज रात्रि 12 बजते ही जन्मोत्सव की महाआरती धूमधाम से की जाएगी।

शहर के प्राचीन गोपाल मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर राजबाड़ा, यशोदा माता मंदिर खजूरी बाजार, इस्कान मंदिर निपानिया, प्रणामी मंदिर गोराकुंड, गोवर्धननाथ मंदिर मल्हारगंज, श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग, राधाकृष्ण मंदिर मल्हारगंज सहित शहर के सभी देवालयों में श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं का श्रृंगार कर फूल बंगला सजाया गया। बालगोपाल के जन्मोत्सव की जोरदार तैयारियां की गई है। रात्रि 12 बजते ही नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... का जयघोष गूंज उठेगा। आधी रात तक दर्शनों का क्रम जारी रहेगा। आज 15 साल बाद जन्माष्टमी पर्व अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बना हुआ है। कई बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि तो रहती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनता। इस बार दोनों एक ही दिन मिल रहे हैं। यही वजह है कि इस जन्माष्टमी पर आज भक्तों में खासा उत्साह बना हुआ है। इस बार वैष्णव और रामानंदी समेत सभी प्रमुख संप्रदाय आज ही एक साथ जन्माष्टमी मना रहे हैं।

सनातन धर्म में यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु ने द्वापर युग में कंस और अन्य दुष्ट शक्तियों का नाश करने तथा पृथ्वी पर धर्म स्थापित करने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का तत्व पृथ्वी पर सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक सक्रिय होता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि कितनी भी कठिन परिस्थितियां हों, अंत में सत्य और सदाचार की ही जीत होती है।

अद्भुत और अलौकिक है श्रीकृष्ण की लीलाएं-

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं वास्तव में अलौकिक, अद्भुत और मानव मन को मोह लेने वाली हैं। यशोदानंदन कन्हैया का बृज में गोपियों के यहां माखन चुराना और प्रेम से सबको अपना बनाना, माता यशोदा को बाल्यावस्था में ही अपने मुख के भीतर संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन कराना, यमुना नदी के जल को विषमुक्त करने के लिए कालिया नाग के फन पर नटखट नृत्य करना, वहीं बृजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठाना और अन्य अनगिनत अद्भुत और अलौकिक लीलाएं श्रीकृष्ण ने इस धरती पर रची थीं।

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