-70 साल पुरानी मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले की जांच को जा रहे थे सहारनपुर
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में 70 साल पुरानी मस्जिद को तोड़े जाने
के मामले में जांच के लिए सहारनपुर जा रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने उनके घरों
पर ही रोक दिया। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान और AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता
शादाब चौहान को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। दोनों के घरों पर देर रात से ही
पुलिस का पहरा लगा दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, सरधना विधायक अतुल प्रधान को शास्त्रीनगर स्थित उनके आवास
पर रोका गया। सोमवार सुबह उनके घर पर सीओ समेत 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे।
वहीं किठौर में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान को उनके घर पर डिटेन किया
गया। सपा और AIMIM के अलग-अलग डेलिगेशन को सहारनपुर जाना था। सपा के 22 सदस्यीय
डेलिगेशन में अतुल प्रधान और AIMIM के डेलिगेशन में शादाब चौहान शामिल थे, लेकिन
पुलिस ने दोनों को घर से निकलने नहीं दिया।
क्या है पूरा मामला
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी 70 साल पुरानी मस्जिद को प्रशासन ने
शनिवार 5 सितंबर को सुबह करीब 5 बजे 6 बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का
कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 17 जुलाई को इसे सरकारी जमीन पर अवैध
अतिक्रमण घोषित किया था और 6.4 करोड़ का जुर्माना लगाया था। मस्जिद कमेटी की अपील
को जिला जज ने 2 सितंबर को खारिज कर दिया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। मौके पर 5
कंपनी पीएसी और आरएएफ तैनात की गई थी। विपक्ष ने इसे जल्दबाजी में की गई कार्रवाई
बताया है। इससे पहले कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को भी उनके घर पर हाउस अरेस्ट
किया गया था।
अतुल प्रधान बोले- लोकतंत्र का हनन
हाउस अरेस्ट पर सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा, "ये कैसा लोकतंत्र है,
जहां हम अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते। हम अन्याय का विरोध करते हैं तो
हमारे घरों में पुलिस लगा दी जाती है। ऐसा लग रहा है जैसे हम अपराधी हों। हमें
आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। सरकार में पूरी तरह लोकतंत्र का हनन हो रहा है।
पुलिस भाजपा के इशारे पर स्टेट पुलिस के रूप में काम कर रही है। इसका जवाब 2027 के
चुनाव में मिलेगा।"
शादाब चौहान बोले- इंसानी हकों का हनन
AIMIM नेता शादाब चौहान ने कहा, "यह इंसानी हकों का हनन है। सहारनपुर में
मस्जिद गिराई गई है, हम उसकी जांच करना चाहते हैं तो हमें रोका क्यों जा रहा है?
इस देश में हमेशा मस्जिदों को ही निशाना क्यों बनाया जाता है? क्या लोकतंत्र में
किसी को अपनी बात कहने का भी हक नहीं रहा?"


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