Tuesday, September 1, 2026

सीसीएसयू में AI गवर्नेंस और डिजिटल फाइनेंस पर विशेष व्याख्यान



ब्राजील के प्रो. डेल्टिन रिबेरो ने किया वैश्विक नियामक परिदृश्य का विश्लेषण


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान (NAAC A++) द्वारा सोमवार को "ग्लोबल रेगुलेटरी लैंडस्केप - एआई गवर्नेंस एंड डिजिटल फाइनेंस: ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के तहत ब्राजीलियाई दृष्टिकोण" विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।


यह व्याख्यान ब्राजील के इटाउना विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) डेल्टिन रिबेरो ब्राजील द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विवेक कुमार त्यागी द्वारा अतिथि परिचय के साथ किया गया। व्याख्यान कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित किया गया। अपने संबोधन में प्रो. डेल्टिन ने बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने डिजिटल भुगतान, ऋण, क्रेडिट स्कोरिंग, बीमा और धोखाधड़ी की पहचान सहित वित्तीय सेवाओं को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि AI वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन इससे भेदभाव, डेटा दुरुपयोग, पारदर्शिता की कमी, साइबर सुरक्षा और डीपफेक धोखाधड़ी जैसे जोखिम भी जुड़े हैं। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा करते हुए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023, आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग निर्देश 2025, FREE-AI फ्रेमवर्क और इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस का विश्लेषण किया। साथ ही यूरोपीय संघ के AI एक्ट, GDPR, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर के नियामक मॉडलों पर भी प्रकाश डाला।


ब्राजील के संदर्भ में उन्होंने ड्राफ्ट बिल नंबर 2,338/2023 और ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के बीच अंतर स्पष्ट किया। पहला AI के लिए क्षैतिज नियामक ढांचा है, जबकि दूसरा ब्राजीलियाई नागरिक संहिता में सुधार का प्रस्ताव है। व्याख्यान के दौरान AI से जुड़े व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि जिम्मेदार AI गवर्नेंस के लिए डेटा सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, मानवीय निगरानी और जवाबदेही जरूरी है। इस अवसर पर विधि अध्ययन संस्थान के शिक्षक, छात्र, शोधार्थी व विधि विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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