Monday, August 3, 2026

FMGE के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन की निंदा

प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
नित्य संदेश। जो विद्यार्थी भारत में NEET-UG जैसी राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा के माध्यम से MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त नहीं कर पाते हैं, उनमें से कई चीन, रूस, फिलीपींस, यूक्रेन तथा अन्य देशों में जाकर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प चुनते हैं।

विदेश से चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद भारत में चिकित्सा व्यवसाय करने के लिए उन्हें Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है। इस परीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के पास भारत में सुरक्षित एवं प्रभावी चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान और दक्षताएँ हैं।

लगभग पिछले दो दशकों से FMGE का औसत उत्तीर्ण प्रतिशत लगभग 20% रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं।

वर्षों से ऐसे असफल अभ्यर्थियों की संख्या लाखों में पहुँच गई है। विदेश जाकर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन ऐसा निर्णय लेने से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी को पात्रता संबंधी आवश्यकताओं तथा निर्धारित उत्तीर्ण मानकों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

अतः FMGE की अनिवार्य योग्यता के विरोध में जंतर-मंतर पर किया जा रहा प्रदर्शन अनुचित है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। व्यावसायिक मानकों में छूट की मांग करने के बजाय ध्यान चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए कि भारत में चिकित्सा सेवा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आवश्यक ज्ञान, कौशल और दक्षता के निर्धारित मानकों को पूरा करता हो।

रोगी की सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सर्वोपरि होनी चाहिए। जन या राजनीतिक दबाव के कारण चिकित्सा क्षेत्र के व्यावसायिक एवं गुणवत्ता मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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