नित्य संदेश ब्यूरो
मुंबई। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिना प्याज और लहसुन के पकाई गई मछली को शाकाहारी माना जा सकता है। गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए इस बयान पर अब गो स्पिरिचुअल और एप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप के संस्थापक सोनू त्यागी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
अवार्ड-विनिंग लेखक, निर्देशक और निर्माता सोनू त्यागी ने कहा कि गो स्पिरिचुअल अपने प्रमुख 'गो वेज' अभियान के माध्यम से इस विचार को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। संगठन का मानना है कि शाकाहार केवल सामग्री या मसालों का विषय नहीं, बल्कि जीवों के प्रति दया, करुणा और सम्मान की भावना है। सोनू त्यागी ने कहा, "आध्यात्मिकता सिर्फ पूजा या कर्मकांड तक सीमित नहीं है। इसका अर्थ है कि हमारे कर्म दया और सभी जीवों के प्रति सम्मान से जुड़े हों। पौधों पर आधारित और हिंसा से मुक्त भोजन इस सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।" उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं हमें सभी जीवों के प्रति दया का संदेश देती हैं। "जानवर भी जीवित प्राणी हैं और उनके जीवन का अपना महत्व है। शाकाहारी भोजन कम से कम नुकसान पहुंचाने और सभी जीवन के प्रति दया रखने की भावना को दर्शाता है।" त्यागी ने स्पष्ट किया कि 'गो वेज' अभियान का उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों में अहिंसा और सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है। गो स्पिरिचुअल का कहना है कि खाना पकाने की कोई भी विधि किसी जीव की हत्या को शाकाहार में नहीं बदल सकती।

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