Wednesday, August 12, 2026

खेल, संदेह और रहस्य के ताने-बाने में बुनी रोमांचक नाट्य प्रस्तुति

 
-नाट्य भारती की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ ही  21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा का सफल समापन


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। नाट्य भारती की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ ही  21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा का सफल समापन हो गया। सानंद नाट्य स्पर्धा मे आज श्री सुमित जी नांदेडकर सीईओ चोइथराम चैरिटेबल ट्रस्ट इंदौर ने दीप प्रचलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।अतिथि स्वागत किया जयंत भिसे, अनिरुद्ध नागपुरकरने । औपचारिक कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया सानंद मित्र  श्री कुणाल पुंडलिक एव कु. श्रेया देशमुख ने ।


बुधवार को नाट्य भारती ने अनिल दांडेकर लिखित और अनिरुद्ध किरकिरे दिग्दर्शित नाटक खेळ का शानदार और प्रभावी मंजन किया। मुंबई की चकाचौंध से दूर एक शांत गांव में बसने वाले चिंतामणि और कावेरी के जीवन में सब कुछ बाहर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर संदेह, अविश्वास और अतीत की परछाइयां लगातार अपना जाल बुन रही हैं। लेखक अनिल दांडेकर का मराठी नाटक ‘खेल’ इसी मानसिक उथल-पुथल को रहस्य और रोमांच की प्रभावशाली शैली में मंच पर आकार देता है। अनिरुद्ध किरकिरे के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक दर्शकों को आरंभ से अंत तक अपनी गिरफ्त में रखता है।

कावेरी कभी फिल्म जगत की चर्चित अभिनेत्री रही है, लेकिन अब उसने उस दुनिया से नाता तोड़ लिया है। इसके बावजूद उसका अतीत उसके वर्तमान का पीछा नहीं छोड़ता। पति चिंतामणि का संशयी स्वभाव इस रिश्ते को और अधिक जटिल बना देता है। उसे आशंका है कि कावेरी का पुराना प्रेमी उससे मिलने वाला है। पत्नी के प्रति उसका मानसिक उत्पीड़न और असामान्य व्यवहार कहानी को लगातार तनावपूर्ण बनाता है। स्थितियां तब रहस्यमय हो जाती हैं, जब चिंतामणि स्वयं पुलिस में कावेरी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराता है। इसके बाद घर में दाखिल होने वाला सब-इंस्पेक्टर केवल एक गुमशुदगी की जांच नहीं करता, बल्कि दर्शकों के सामने रिश्तों, स्मृतियों और मनोवृत्तियों की परतें खोलता जाता है। पूछताछ के दौरान सामने आने वाले अप्रत्याशित तथ्य कहानी को बार-बार नई दिशा देते हैं। कौन सच बोल रहा है और कौन कहानी गढ़ रहा है, यह सवाल दर्शकों के मन में लगातार बना रहता है।


अनिल दांडेकर की कसावट भरी पटकथा और धारदार संवाद नाटक के तनाव को कहीं ढीला नहीं पड़ने देते। अनिरुद्ध किरकिरे का निर्देशन रहस्य को बनाए रखते हुए दृश्यों की गति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। नेपथ्य, प्रकाश योजना और पार्श्व संगीत मिलकर शांत वातावरण में छिपी बेचैनी को गहरा करते हैं।


चिंतामणि की मानसिक व्याकुलता, कावेरी के अतीत का दर्द और पुलिस अधिकारी की संयमित पड़ताल,तीनों प्रमुख भूमिकाओं में कलाकारों का प्रभावी अभिनय नाटक को विश्वसनीयता देता है। अंत में रहस्य की अंतिम परत खुलती है तो दर्शकों को अप्रत्याशित झटका मिलता है। ‘खेल’ केवल सस्पेंस का नाटक नहीं, बल्कि संदेह किस तरह रिश्तों और मनुष्य की मानसिक दुनिया को भीतर से खोखला कर सकता है, इसकी भी प्रभावशाली पड़ताल है।

कलाकार — विकास डिंडोरकर, सौजन्य लघाटे, समृद्धि बेलसरे, आर्यन गर्गे   

लेखक — अनिल दांडेकर 

दिग्दर्शक — अनिरूद्ध किरकिरे 

ध्वनि संकलन — शशिकांत किरकिरे

रंगभूषा योजना — अंकुर लोकरे, 

वेषभूषा योजना — श्रुतिका जोग-कळमकर

नेपथ्य योजना — अनिरूद्ध किरकिरे

प्रकाश योजना — अभिजीत कळमकर

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