Monday, August 31, 2026

मुगलिया प्रेम —सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

 
नित्य संदेश

मुगलिया प्रेम...

नेपोटिज्म चाइल्ड ट्विंकल खन्ना खुद को जितना समझदार समझती है उतनी है नहीं। सदैव से ओवर एक्टिंग की दुकान, इस बार सुर्खियां बंटोरने के लिए मुगलों पर प्रेम लूटा रही है।


​ये मोहतरमा बात तो ऐसी कर रही है कि जैसे मुगल लोग भारतीय लोगो की थाली में कोरमा, कबाब बनाकर परोस रहे है और जैसे इसने हर घर में झाँककर देख लिया है कि रोज लोग थाली में कोरमा, कबाब ही खा रहे है।


​अरे नेपो बेबी ट्विंकल यूं तो हम भारतीय चायना के सामान का भी बाॅयकाट करते है तो क्या चायनीज खाना भी छोड़ दें?


​अक्ल की दुश्मन क्या इटालियन, मैक्सीकन, थाई, जेपनीज़ फूड जो भारत में मिलते है उनको भी छोड़ दे। क्यों छोड़ेगे यहां उसे बना तो भारतीय ही रहे है।


​वैसे ही मुगल आक्रांता हमारे भारत में आए तो कोरमा, कबाब बनाने की सब सामग्री यही से ली और जो खा भी रहे है तो आज भी यही के मसाले, जल से बनाकर खा रहे है। कोई मुगल देश वाले नहीं परोस रहे। 


​तुम्हारे पति अक्षय कुमार ने शेफ का काम किया है तो उससे ही ये छोटी सी बात समझ लेती तो विचार नहीं कर रही होती कि किसकी थाली में कोरमा, कबाब हो और किसकी में नहीं।


​भोजन की थाली से इतिहास का तराज़ू तौलने का यह अजीबो-गरीब तर्क केवल एक फ़िल्मी संवाद ही हो सकता है, गंभीर चिंतन नहीं।


​वैसे भी ​इतिहास से किसी को मिटाने की बात नहीं हो रही, बल्कि आक्रांताओं को उनके सही कद और रूप में दिखाने की बात है। जो देश पर हमला करने आए, उन्हें नायक बनाकर पूजने के बजाय आक्रांता ही कहा जाएगा।


​हम अपने उस गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों की वाहवाही क्यों न करें, जिनकी बदौलत हमारी संस्कृति आज भी जीवित है?


​बड़ी-बड़ी सल्तनतें और क्रूर आक्रांता समय के थपेड़ों में धूल हो गए, पर हमारी जड़ें आज भी अटल हैं। सही कहा गया है—

​"कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,

सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माना हमारा।"


​व्यंजनों का स्वाद चखना एक बात है और देश के इतिहास की बलि देकर आक्रांताओं का महिमामंडन करना दूसरी बात। इतिहास किताबों में वही जगह पाएगा जिसका वह हक़दार है, चाहे किसी की थाली में कोरमा, कबाब हो या न हो।


—सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

समाचार संपादक, नित्य संदेश

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