Friday, August 21, 2026

सरकारी अस्पतालों में जर्जर वाहन बने मच्छरों का अड्डा

 


-जागरूकता बोर्डों पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से की शिकायत

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। एक तरफ सरकार डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के परिसर खुद मच्छरों के प्रजनन केंद्र बने हुए हैं।


अस्पताल परिसरों में वर्षों से खड़े पुराने, जर्जर और कंडम वाहन स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन गए हैं। इन वाहनों में कचरा, धूल-मिट्टी और बरसात का पानी जमा है, जिसमें मच्छरों के लार्वा पनप रहे हैं। विडंबना देखिए कि इन्हीं अस्पतालों में जगह-जगह बड़े-बड़े बोर्ड लगे हैं, जिन पर लिखा है - "आसपास पानी जमा न होने दें, पुराने टायर, डिब्बे और कबाड़ में मच्छर पनपते हैं।" लेकिन अस्पताल प्रशासन को अपने परिसर में खड़े कबाड़ वाहन दिखाई नहीं दे रहे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल वह जगह है, जहां लोग स्वास्थ्य सुरक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन परिसर में ही जलभराव और गंदगी के स्रोत मौजूद हैं तो संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।


नीलामी से खाली होगी जगह, मिलेगा राजस्व

यदि इन अनुपयोगी वाहनों की पहचान कर नियमानुसार नीलामी कर दी जाए तो दो फायदे होंगे। एक तो अस्पताल परिसर में वर्षों से घिरी कीमती जगह खाली होगी और स्वच्छता में सुधार होगा, दूसरा सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा।


इन्होंने की शिकायत

इस मामले को लेकर प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और सरकारी चिकित्सालयों का सर्वे कराकर जर्जर वाहनों को तत्काल नीलाम कराया जाए और अस्पताल परिसरों को स्वच्छ व मच्छरमुक्त रखने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं।

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