Tuesday, August 11, 2026

बताओ माधव... —रविंद्र सिंह 'सूर्योदय' की कविता

नित्य संदेश 

​बताओ माधव

बताओ माधव...

अगर यह पिछले जन्म के कर्मों की सज़ा है...

तो अपराध याद क्यों नहीं?

हर परिणाम स्वीकार है,

पर गलती याद भी न रहने दो,

अपराधी भी मान लो...

और फिर उसी के लिए कष्ट भी दो...

बताओ माधव, क्या यह सही है?

सुनो सखी...

​जो अपराध याद रह गए...

तो सज़ा तुम्हें कम लगेगी?

और जो बता दी गलती,

तो क्या दोबारा नहीं करोगी...

विश्वास रखो अपने माधव पर,

जो मिला सहर्ष स्वीकार करो।

या बदल दो कर्मों को अपने,

और परिणाम अपने अनुसार करो...

दुःख तो जाने कितने ही...

मेरे हिस्से भी आए थे...

सब कुछ खोकर भी तो सखी...

माधव तुम्हारे मुस्कुराए थे।


​बातें मेरी शायद तुमको,

अभी कुछ आहत कर जाएँगी।

लेकिन जब पीछे मुड़कर देखोगी...

तब समझ तुम्हें आएगी।


​नियति ने जो तय किया...

उसमें न हस्तक्षेप हमारा है...

जो पाया जिसने पाया...

सब अपने कर्मों का साया है।

हे सखी! 

मुस्कुराओ, देखो तुमसे ज़्यादा कोई दुखियारा है...

जो जीवन तुमने पाया, वह भी किसी का स्वप्न प्यारा है।

​अब शिकायत करोगी तुम...

या शुक्रिया कर पाओगी...

​जो भी करो इच्छा तुम्हारी...

मगर याद रखना!

जो करोगी वही पाओगी।



​— रविंद्र तंवर "सूर्योदय" 

बड़वाह (म. प्र.)

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