Friday, August 28, 2026

विधायक अमित अग्रवाल के प्रयासों से बिल्वेश्वरनाथ मंदिर के विकास की राह प्रशस्त

 


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कैंट विधानसभा के ऐतिहासिक बिल्वेश्वरनाथ महादेव मंदिर सदर और श्री विश्वनाथ महादेव मंदिर छत्ता अनन्तराम गुजरी बाजार के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की राह अब प्रशस्त हो गई है। विधायक अमित अग्रवाल के लगातार दो वर्षों से किए जा रहे प्रयासों के बाद पर्यटन विभाग ने इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निर्माण कार्य के लिए सर्वे भी प्रारंभ हो गया है।


विधायक अमित अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 23 जून 2024 को पत्रांक 4344/वि०मे०कैंट/2024 के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को पत्र भेजकर मंदिर के जीर्णोद्धार एवं कॉरिडोर निर्माण के लिए धनराशि की मांग की थी। उस समय 1 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित भी हुई थी, लेकिन पुजारियों और कुछ निजी व्यक्तियों द्वारा स्वयं को मंदिर का स्वामी बताए जाने के कारण धनराशि का उपयोग नहीं हो सका और वह शासन को वापस हो गई। इसके बाद विधायक ने लगातार प्रयास जारी रखे। 13 मार्च 2026 को पत्रांक 5739/वि०मे०कैंट/2026 के माध्यम से वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में पुनः मंदिर के विकास की मांग की गई और 16 अप्रैल 2026 को पत्रांक 5864/वि०मे०कैंट/2026 के द्वारा बिल्वेश्वरनाथ मंदिर और विश्वनाथ महादेव मंदिर सहित अन्य प्राचीन स्थलों के विकास का प्रस्ताव रखा गया।


17 मई 2026 को क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी मेरठ मंडल दीपिका सिंह ने विधायक के साथ बिल्वेश्वरनाथ मंदिर का निरीक्षण एवं सर्वे किया। 23 जुलाई 2026 को आयुक्त मेरठ मंडल के सभागार में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधायक ने फिर से प्रस्ताव पर जोर दिया। विधायक के आग्रह पर मेरठ-हापुड़ सांसद अरुण चन्द्रप्रकाश गोविल ने 27 जुलाई 2026 को पत्रांक लो.स.मे./1089/2026 के माध्यम से पर्यटन मंत्री को पत्र भेजकर धनराशि आवंटन का अनुरोध किया। इसके बाद क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी ने 31 जुलाई को पत्रांक 1275936/1561 द्वारा संस्तुति सहित कार्ययोजना में शामिल करने हेतु पत्र लिखा।


रामायणकाल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

विधायक ने बताया कि बिल्वेश्वरनाथ महादेव मंदिर मेरठ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। मान्यता है कि प्राचीन मयराष्ट्र के संस्थापक वास्तुविद् मय की पुत्री मंदोदरी, जो शिव भक्त थीं, इसी स्थल पर पूजा करती थीं। परिसर में जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा, बालाजी और राधाकृष्ण के मंदिर भी हैं तथा बिल्वेश्वर महादेव संस्कृत महाविद्यालय भी संचालित है जो संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी से संबद्ध है। विधायक ने बताया कि जैसे विश्वनाथ महादेव मंदिर के विकास के लिए इस वित्तीय वर्ष में 1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है, वैसे ही बिल्वेश्वरनाथ मंदिर के लिए भी जल्द धनराशि स्वीकृत होगी। उन्होंने इसके लिए प्रदेश सरकार, पर्यटन विभाग और सांसद अरुण गोविल का आभार व्यक्त किया।

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