नित्य संदेश
असली तानाशाही...
अपने देश में राजनीति, तानाशाही और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर विपक्षियों का दोहरा रवैया हमेशा देखने को मिलता है।
हुआ यूं कि तंजौर (तंजावुर) में कावेरी जल विवाद की जनसभा के दौरान ईसाई नेता उदयनिधि स्टालिन ने हंसते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री विजय थलपति और उनकी प्रेयसी तृषा कृष्णन के जगजाहिर रिश्ते को लेकर एक बेहद गंदी, द्विअर्थी और अमर्यादित टिप्पणी कर दी।
इसके बाद थलपति की पार्टी TVK की महिला विंग को यह बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने महिलाओं के अनादर और अश्लील भाषा के इस्तेमाल से जुड़ी धाराओं में उदयनिधि के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवा दी। तत्पश्चात 4 अगस्त को उदयनिधि को उनके चेन्नई स्थित निवास से हिरासत में ले लिया गया।
हालांकि, मैं इस ईसाई स्टालिन पर हुई कार्रवाई से बेहद खुश हूं। यह वही स्टालिन है जिसने सनातन धर्म का अपमान किया था।
अब इस घटना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम सनातनी कितने सहनशील हैं और हमारे सनातनी प्रधानमंत्री मोदी जी कितने सरल और सहिष्णु हैं। उन्हें 2006 से सोनिया गांधी और मणिशंकर अय्यर जैसे नेता आगे बढ़कर गलत बोलते आए हैं (हालांकि मोदी जी ने भी कई बार तंज कसा है)।
लेकिन अभी देखिए, जंतर-मंतर पर मोदी जी को चंद छात्रों, फंडिंग पर बुलवाए गए इन्फ्लुएंसर्स और CJP के उकसाए लोगों ने लगातार अकारण ही कितने अपशब्द कहे। यहां तक कि उनकी स्वर्गीय, पूजनीय माता जी—जिनका राजनीति से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा—उन पर भी भद्दी टिप्पणियां की गईं।
फिर भी मोदी जी सच्चे सनातनी हैं और उन्होंने बड़प्पन दिखाते हुए कभी न क्षमा करने योग्य लोगों को भी क्षमा कर दिया।
वहीं, जब सितंबर 2023 में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और एम.के. स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना 'मलेरिया, डेंगू और कोरोना' जैसी बीमारियों से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी, तब भी हम सनातनियों ने असीम धैर्य और शांति का ही परिचय दिया था।
दूसरी तरफ ईसाई मुख्यमंत्री विजय थलपति हैं, जो हाल ही में अपनी प्रेयसी तृषा पर हुई एक टिप्पणी को भी सहन नहीं कर पाए।
सबसे बड़ा दोहरापन तो यह है कि "कांग्रेस" उस समय ईसाई स्टालिन के साथ थी और इस समय उसने ईसाई थलपति से हाथ मिला रखा है। तो क्या राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा को इस मामले में विजय थलपति की तानाशाही और स्टालिन की अभिव्यक्ति की आजादी का हनन नजर नहीं आता? इनकी नज़रों में हिंदू माफ करकर भी हिंसक और तानाशाह है।
खैर, हमारे देश के विपक्षी नेता बहुत दोहरे चरित्र के हैं। लेकिन जनता को अब खुद समझना होगा कि असली तानाशाह कौन है और असली सहिष्णुता किसके पास है?
सच कहूं तो भारत में तब तक ही शांति, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह सुरक्षित है, जब तक सनातन धर्मावलंबी बहुसंख्यक और सच्चे सनातनी देश के उच्च पदो पर हैं।
— सपना सी.पी. साहू
नित्य संदेश, समाचार संपादक


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