Sunday, August 30, 2026

कैंट में अवैध निर्माणों पर बोर्ड की मिलीभगत का आरोप, इंजीनियरों की आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग

 


अशोक कुमार

नित्य संदेश, मेरठ। कैंट क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर कैंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अवैध निर्माण में बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत है और बड़े अधिकारी मौन साधे हुए हैं।


सूत्रों के अनुसार, कैंट क्षेत्र में ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई समय-समय पर गुडवर्क के रूप में दिखाई तो देती है, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई मामलों में कार्रवाई के बाद भी उसी स्थान पर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें खड़ी हो जाती हैं। आरोप है कि तथाकथित बिल्डरों द्वारा अवैध रूप से कॉमर्शियल निर्माण कर लाखों रुपये का कारोबार किया जा रहा है। वहीं गरीब व सामान्य परिवार के छोटे निर्माण पर तुरंत हथौड़ा चल जाता है। आरोप है कि पब्लिक प्लेस और बिल्डरों के बीच भ्रष्ट अधिकारियों के दलालों के माध्यम से सीधे डीलिंग होती है। शिकायत होने पर कार्रवाई का दिखावा किया जाता है, फिर भारत सरकार की भूमि होने का हवाला देकर जमीन की कीमत के हिसाब से और अवैध निर्माण पर प्रति लेटर के हिसाब से लाखों रुपये वसूली का खेल चलता है।


आय से अधिक संपत्ति का आरोप - सूत्रों ने आरोप लगाया है कि यदि अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जाए तो कई अधिकारी सौ-सौ करोड़ के मालिक निकल सकते हैं। आरोप है कि एक जेई दस साल की नौकरी में कंकरखेड़ा में लगभग दो करोड़ की लागत से लग्जरी भवन बना रहा है, सात लाख की बाइक और चालीस लाख की लग्जरी कार का मालिक है। वहीं एक अन्य सेक्शन हेड जो मामूली यजदी मोटरसाइकिल से नौकरी में आए थे, आज लग्जरी कारों में चल रहे हैं।


आरोप है कि जब कोई इन मामलों को उजागर करने की कोशिश करता है तो उस पर विभिन्न आरोप लगाकर उसे शांत करा दिया जाता है। यदि पूरे कैंट क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और अवैध निर्माण का आंकलन किया जाए तो यह खेल अरबों रुपये का बताया जा रहा है। मांग की गई है कि कैंट बोर्ड के अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध निर्माण व सरकारी भूमि पर कब्जे के मामलों में संलिप्त अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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