Friday, August 28, 2026

लाचारी... —डॉ शबनम सुल्ताना

नित्य संदेश

लाचारी

देखकर ये लाचारी, उनकी

दिल दहल जाता है।

सारी उम्र जिंदगी ने बैठने न दिया

कभी गुरबत कभी मेहनत 

कभी हिम्मत दिखा 

तिनके-तिनके से आशियाना बनाया जिन्होंने

वक्त की आंधी ने उन्हें अपाहिज बना

मोहताज बना दिया

अब हंसते खेलते उम्र का आखिरी पड़ाव बिताएंगे

खुशी से सुख से पोता पोती खिलाएंगे।

लेकिन अभी एक कर्ज बाकी रहा।

सारी जिंदगी जिसे आराम न मिला 

वो जिस्म बीमारियों का घर बना।

क्या पाया या खोया इसका हिसाब क्या।

बुढापा सुख से रहे,इस चाह में 

दिल खुद मौत का सौदागर बना।



—डॉ शबनम सुल्ताना 

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