शाहिद खान
नित्य संदेश, नई दिल्ली। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना काशी प्रांत का एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के क्षेत्रीय कार्यालय पारस विद्यापीठ करौंदी में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रतिपाद्य विषय "इतिहास प्रयोजन :अध्ययन, अनुसंधान एवं लेखन था।"
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. बालमुकुंद पांडे, राष्ट्रीय संगठन सचिव ,अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना झंडेवालन, नई दिल्ली रहे। उनका कहना है कि वरिष्ठ विद्वान इतिहासकारों को समाज को सकारात्मक दिशा देना चाहिए। सभी को युवाओं को सकारात्मक एवं स्वर्णिम भविष्य के निर्माण कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिए। उनका कहना है कि युवाओं को शिक्षा में सुधार, रोजगार ,अवसर और अन्य लोकहित के मुद्दों पर रचनात्मक, अहिंसक एवं सविनय विरोध करनाचाहिए। इतिहास -लेखन की दृष्टि भारतीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों, जीवन दृष्टि एवं राष्ट्रीय आदर्शों के अनुरूप होना चाहिए।
मुख्य अतिथि का कहना हैं कि, भारत का स्वतंत्रता संघर्ष शांतिपूर्ण जनांदोलनों की शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। आद्य सरसंघचालक पूजनीय डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार जी ने अहिंसा एवं लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से जनभागीदारी को व्यापक स्वरूप दिया । पूजनीय केशव बलिराम हेडगेवार जी और द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय गुरुजी ने" लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण तरीकों के माध्यम से अपने विचारों, मूल्यों और आदर्शों को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाएं।" आपातकाल भारतीय लोकतांत्रिक संस्कृति और संसदीय इतिहास का "काला अध्याय "माना जाता है। उस दौर में तत्कालीन सरसंघचालक और सर - कार्यवाह के नेतृत्व में लोकतांत्रिक एवं अहिंसक तरीकों से विरोध किया गया। भारत में शांतिपूर्ण विरोध केवल एक संवैधानिक अधिकार ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण एवं अभिन्न हिस्सा है।
संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) देवी प्रसाद सिंह ने कहा कि, वही व्यक्ति इतिहास संकलन समिति का दायित्ववान सदस्य हो सकता है, जो उच्च चरित्र ,त्याग, शील एवं निष्ठावान व्यक्तित्व का हों। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफेसर आनंद शंकर सिंह,प्रांत अध्यक्ष काशी प्रांत ने कहा कि, इतिहास अध्ययन का उद्देश्य राष्ट्र -निर्माण के चेतना को उन्नयन करना है। संगोष्ठी की संयोजिका एवं संचालिका प्रोफेसर अनुराधा सिंह ने इतिहास- लेखन पर दूर -दृष्टि एवं ऐतिहासिक उपागम पर अपना विद्वत्त मार्गदर्शन किया।

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