Sunday, August 30, 2026

मेरठ के 210 से अधिक कुम्हारों को मिला निशुल्क इलेक्ट्रिक चाक का सहारा

 


-50-60 दीयों की जगह अब एक घंटे में तैयार हो रहे 300-400 डिजाइनर दीए

लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठ। योगी सरकार की योजनाओं ने मिट्टी से जीवन गढ़ने वाले कुम्हारों के हुनर को आधुनिक तकनीक का सहारा दिया है। ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत मिले इलेक्ट्रिक चाक ने मेरठ के कुम्हारों की मेहनत को रफ्तार देने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने का काम किया है। पारंपरिक चाक पर जहां सीमित संख्या में दीए और मिट्टी के उत्पाद तैयार हो पाते थे, वहीं इलेक्ट्रिक चाक से उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। कुम्हारों के अनुसार, डिजाइनर दीयों और दूसरे उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच उनकी आमदनी में करीब पांच गुना तक बढ़ोतरी हुई है।


माटीकला बोर्ड की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में शुरू की गई योजना के तहत अब तक मेरठ जिले में 210 से अधिक कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक वितरित किए जा चुके हैं। करीब 13 से 15 हजार रुपये कीमत का यह चाक बीपीएल परिवारों के कुम्हारों को निशुल्क दिया जाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी 40 लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य है। गढ़ रोड निवासी सुरेश बताते हैं कि पहले पारंपरिक चाक से एक निश्चित समय में करीब 50-60 दीए ही तैयार हो पाते थे। इलेक्ट्रिक चाक आने के बाद इसी समय में 300-400 तक डिजाइनर दीए तैयार हो जाते हैं। इससे उत्पादन क्षमता छह से सात गुना तक बढ़ गई है। दीपावली के समय मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से इसका सीधा लाभ कुम्हार परिवारों की आय पर पड़ रहा है। कुम्हार मनोज कुमार बताते हैं कि इस बार दीपावली के लिए उन्हें अभी से करीब ढाई लाख दीयों का ऑर्डर मिल चुका है। इलेक्ट्रिक चाक से एक घंटे में करीब 700 दीयों का निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि लोगों में मिट्टी के पारंपरिक दीयों और अन्य मिट्टी उत्पादों के प्रति फिर से आकर्षण बढ़ रहा है।


सेहत और मेहनत दोनों को मिला सहारा

दीपक प्रजापति बताते हैं कि पहले हाथ से चलने वाले चाक पर काम करना बेहद थकाऊ था। लंबे समय तक काम करने में हाथ, कंधे और सीने में दर्द जैसी दिक्कतें होती थीं। परिवार के सदस्य भी सीमित समय तक ही काम कर पाते थे। इलेक्ट्रिक चाक ने यह स्थिति बदल दी। अब परिवार के सदस्य मिलकर 10 से 12 घंटे तक आसानी से काम कर लेते हैं। बिहारी प्रजापति के मुताबिक नई तकनीक ने माटीकला को रफ्तार दी है और बड़े ऑर्डर पूरे करना भी आसान हुआ है।


हर समाज का व्यक्ति ले सकता है लाभ

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में मिट्टी के दीयों और बर्तनों की मांग बढ़ी है। पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ देकर माटीकला से जुड़े परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा रहा है। अब सामान्य लोग भी मिट्टी के बर्तन और दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


किनको मिल सकता है योजना का लाभ

योजना का लाभ केवल प्रजापति समाज तक सीमित नहीं है। किसी भी समाज का इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर सकता है। आवेदक संबंधित जिले का मूल निवासी और 18 से 55 वर्ष की आयु का होना चाहिए। टूल-किट मिलने से पहले मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण अनिवार्य है। परिवार में पहले किसी विभाग या संस्था से माटीकला टूल-किट न मिली हो तथा आवेदक का माटीकला कारीगर के रूप में पंजीकरण और तहसील स्तर से सत्यापन भी जरूरी है।

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