
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि असली ऊर्जा बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपी होती है। तनाव, भागदौड़ और मानसिक दबाव के बीच स्वयं को पहचानना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसके बाद देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, योग, मेडिटेशन, हीलिंग, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली पर अपने विचार साझा किए।
• हर फैसला सोच-समझकर लें, सभी को खुश रखना संभव नहीं – डॉ. संदीप अत्रे
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट एवं इमोशनल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट डॉ. संदीप अत्रे ने कहा कि आज अधिकांश तनाव हमारी सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया से पैदा होता है। उन्होंने कहा कि हर निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए, क्योंकि जीवन कोई ऑटो मोड पर चलने वाला सिस्टम नहीं है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि "हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति हमें पसंद करे, लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं होता। इसलिए जो सही है, वही पूरे मन से कीजिए। जो पाना है, उसके लिए पूरी निष्ठा से कर गुजरिए।" उनके विचारों ने उपस्थित लोगों को जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी।
• योग शरीर नहीं, जीवन को जोड़ने की कला है" – डॉ. निशा जोशी
अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ एवं डबल पीएच.डी. डॉ. निशा जोशी ने योग और भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुःख दोनों आते हैं, लेकिन हमारा ध्यान कर्म पर होना चाहिए, फल पर नहीं।
उन्होंने महर्षि पतंजलि के सूत्र "स्थिरं सुखमासनम्" का उल्लेख करते हुए बताया कि स्थिरता ही सुख का आधार है। उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि से ज्ञान आता है, ध्यान से योग की अनुभूति होती है और योग से शांति तथा आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। उनके योग एवं ध्यान अभ्यास में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
• अपने भीतर के 'मैं' को पहचानिए – शुभांगी चौहान
That Healing Energy की फाउंडर सुश्री शुभांगी चौहान ने आत्मचिंतन और ऊर्जा विज्ञान पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न है—"मैं कौन हूँ और इस संसार में क्यों आया हूँ?
उन्होंने कहा कि भगवद्गीता प्रश्नों का ग्रंथ है, उत्तरों का नहीं। सही प्रश्न ही व्यक्ति को सही दिशा देते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि यदि जीवन में आगे बढ़ना है तो अपने आसपास का वातावरण सकारात्मक रखें, क्योंकि अच्छा माहौल ही अच्छी ऊर्जा पैदा करता है।
• "रंगों में छिपी है मन को सुकून देने की शक्ति" – अपूर्वा राजे
आर्ट हीलिंग विशेषज्ञ एवं म्यूरलिस्ट सुश्री अपूर्वा राजे ने कहा कि कला केवल चित्र बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि मन को समझने और तनाव दूर करने का प्रभावी तरीका है। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि व्यस्त जीवन में कुछ पल स्वयं के लिए निकालिए, थोड़ा विराम दीजिए और कला के माध्यम से अपने मन से जुड़िए। उनके आर्ट हीलिंग सत्र को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
• "सब कुछ होने के बाद भी खालीपन क्यों?" – सुश्री अंकिता डावर
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सुश्री अंकिता डावर ने आधुनिक जीवन की मानसिक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज अधिकांश लोग सब कुछ हासिल करने के बाद भी भीतर से खाली महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समस्याओं का समाधान केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि स्वयं को समझने, स्वस्थ संवाद, आत्मस्वीकृति और भावनात्मक संतुलन में छिपा है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही आवश्यक है जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की।
• प्रतिभागियों ने लिया संवाद और अनुभव का लाभ
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से खुलकर संवाद किया तथा मानसिक स्वास्थ्य, मेडिटेशन, योग, काउंसलिंग, हीलिंग और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़े प्रश्न पूछे। पूरे सत्र में व्यावहारिक अभ्यास, प्रेरक उदाहरण और जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए गए, जिससे उपस्थित लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा मिली।
• IMA ने दिया सकारात्मक समाज निर्माण का संदेश
इस अवसर पर इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था केवल प्रबंधन और नेतृत्व विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार ऐसे सार्थक कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि सफलता तभी सार्थक है, जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ, भावनात्मक रूप से संतुलित और भीतर से ऊर्जावान हो।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं का सम्मान किया गया। उपस्थित प्रतिभागियों ने इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की।
INNERGY केवल एक सेमिनार नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, मानसिक शांति और भीतर छिपी ऊर्जा को पहचानने की एक प्रेरक यात्रा साबित हुआ, जिसने सभी प्रतिभागियों को जीवन को नए दृष्टिकोण से जीने की प्रेरणा दी।





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