Saturday, June 27, 2026

पवमान सोम, इन्द्र और अग्नीन्द्र देवताओं से सम्बन्धित मन्त्रों की कथा कही

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कथाव्यास प्रो. पूनम लखनपाल ने प्रो.सुधाकराचार्य त्रिपाठी जी की प्रेरणा से शास्त्रीनगर में निजनिवास पर सामवेद की अष्टमकथा  के चतुर्थ दिन सामवेद के पञ्चम एवं  षष्ठ प्रपाठक की कथा के अन्तर्गत पवमान सोम, इन्द्र और अग्नीन्द्र देवताओं से सम्बन्धित मन्त्रों की कथा कही।

ऋषियों द्वारा सम्भृत पावमानी अर्थात् पवित्र करने वाली ऋचाओं का श्रवण, मनन और चिन्तन करने से सरस्वती दूध,घी, मधु और जल प्रदान करती है अर्थात् पोषण, स्नेहन, माधुर्य और रस देती है। अग्नि सर्वत्र है। डॉ पूनम ने लौकिक उदाहरण दिये। अग्नि, सूर्य और विद्युत् के अतिरिक्त हमारे शरीर के तापमान, बिजली के उपकरणों, लाइटर, कार, स्कूटर के इग्निशन आदि सभी में अग्नि का रूप है। अग्नीन्द्र का रूप है विद्युत्।

ऋषिगण इन्द्र से प्रार्थना करते हैं कि हे इन्द्र ! जिस जिस से हमें भय है,उस उस से हमें अभय करो। डॉ पूनम ने ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से विभिन्न मन्त्रों को उद्धृत करते हुए कहा कि हमें मित्र से, अमित्र से, ज्ञात से, अज्ञात से, रात से, दिन से सभी से अभय प्रदान करो। इन्द्र सभी के युवा मित्र हैं जब इन्द्र यज्ञ में उपस्थित होते हैं तो उसकी रक्षा के लिए किसी आयुध की आवश्यकता नहीं होती। याजक प्रार्थना करते हैं कि आप हमारी प्रार्थनाएं कब सुनेंगे। हम विविध मन्त्रों और छन्दों से स्तुतिगान करते हैं।

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