Saturday, June 13, 2026

योग के माध्यम से मन और शरीर की एकाग्रता ही जीवन की परम गति : योगाचार्य अमरपाल

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के 13वें दिन योग साधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं शुद्धि क्रियाओं का अभ्यास किया। योग सत्र का शुभारंभ योगाचार्य अमरपाल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत रूप से किया गया। 

इस अवसर पर योगाचार्य अमरपाल ने योग के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि त्रिशिखि ब्राह्मण उपनिषद में वर्णित है कि जब आसनों का अभ्यास श्वास-प्रश्वास की गति के साथ समन्वित होकर किया जाता है, तब मनुष्य के मन में उत्पन्न होने वाले चंचल विचार धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं। विचारों की शांति के साथ-साथ सांसारिक विषयों एवं भौतिक वस्तुओं के प्रति अनावश्यक लालसा भी समाप्त होने लगती है। परिणामस्वरूप शरीर एवं मन एकाग्रचित होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। यही अवस्था योग की परम गति मानी गई है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की एक संपूर्ण प्रक्रिया है। योगाभ्यास व्यक्ति को मानसिक तनाव, चिंता तथा विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं से मुक्ति प्रदान करता है। योग ग्रंथों में कहा गया है कि "आसनेन रुजो हन्ति", अर्थात् नियमित आसन अभ्यास से शरीर की अनेक व्याधियों एवं रोगों का नाश किया जा सकता है। वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच योग एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार के रूप में उभर रहा है। 

योग सत्र के दौरान सभी योग साधकों ने पवनमुक्तासन, हलासन, नौकासन, मंडूकासन एवं वज्रासन का अभ्यास किया। इसके अतिरिक्त शरीर की आंतरिक शुद्धि एवं पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु नौलि क्रिया का भी अभ्यास कराया गया। प्राणायाम सत्र में कपालभाति, अनुलोम-विलोम, उज्जायी प्राणायाम तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। योगाचार्य अमरपाल ने प्रत्येक अभ्यास के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की विस्तार से जानकारी देते हुए साधकों को नियमित योगाभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक स्थिरता विकसित होती है तथा व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे आज विश्वभर में स्वास्थ्य एवं कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

कार्यक्रम में डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. वैशाली पाटील, अंजू मलिक, राखी सिंह, राकेश कुमार, अर्चना, विवेक कुमार, वंश चौधरी, शिवानंद सहित अनेक योग साधक एवं विभाग के सदस्य उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने का संकल्प लिया।

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