Sunday, June 21, 2026

बादलों ने डाला खलल, पृथ्वी की परिधि मापन का प्रयोग नहीं हो सका; ‘धरती आकाश’ कार्यशाला का हुआ समापन

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। प्रगति विज्ञान संस्था एवं जिला विज्ञान क्लब द्वारा विज्ञान घर, बिजली बंबा बाईपास में आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यशाला ‘धरती आकाश’ का रविवार को सफल समापन हुआ। कार्यशाला के दूसरे एवं अंतिम दिन विज्ञान, योग तथा खगोलीय अवलोकन से जुड़ी विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, विज्ञान प्रेमियों एवं आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रातःकालीन सत्र में सूर्य उदय फोटोग्राफी एवं योगाभ्यास का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के मनोहारी दृश्यों को कैमरे में कैद किया तथा योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश ग्रहण किया। विशेषज्ञों ने योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। दोपहर के सत्र में पृथ्वी की परिधि मापन से संबंधित ऐतिहासिक वैज्ञानिक प्रयोग प्रस्तावित था, किंतु पूरे दिन सूर्य के दर्शन न होने और मौसम प्रतिकूल रहने के कारण यह प्रयोग संपन्न नहीं हो सका। इसके स्थान पर प्रतिभागियों को पृथ्वी की परिधि मापन की वैज्ञानिक पद्धति, उसके सिद्धांत और ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। 

विशेषज्ञों ने बताया कि प्राचीन वैज्ञानिकों ने सूर्य की किरणों और छाया के अध्ययन के आधार पर पृथ्वी के आकार एवं परिधि का सटीक अनुमान लगाया था। सायंकालीन सत्र में पृथ्वी विज्ञान एवं खगोल विज्ञान विषयों पर चर्चा आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने ब्रह्मांड, तारों, ग्रहों तथा वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। इसके बाद खुले आकाश के नीचे स्काई वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने दूरबीनों की सहायता से आकाशीय पिंडों का अवलोकन कर खगोल विज्ञान की रोचक जानकारियां प्राप्त कीं। 

कार्यशाला संयोजक शालिनी पाल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं एवं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा विज्ञान को प्रयोगों और प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से समझाना है। दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में प्रतिभागियों ने खगोल फोटोग्राफी, ब्रह्मांड विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, योग एवं वैज्ञानिक अवलोकन की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में डॉ. पवन कुमार, कृष्णा वत्स, सतबीर नागल, दीपक शर्मा, गीता शर्मा, उत्कर्ष, कबीर सहित अनेक विज्ञान कार्यकर्ता एवं विज्ञान प्रेमी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने ऐसे नवाचारी विज्ञान कार्यक्रमों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

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