Sunday, June 21, 2026

तिलक लगाकर पुत्रों को धर्म की रक्षा के लिए भेजा, उन्हीं माओं के कारण धर्म संस्कृति सुरक्षित है: महाराज

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। रघुवंश की माताओं का चरित्र सुनाते हुए महाराज जी ने मां कौशल्या सुमित्रा मां जानकी एवं उर्मिला जी के चरित्र को आदर्श चरित्र होता है और कहां यह देश यह धर्म संस्कृति यदि सुरक्षित है इन्हीं माताओं और बहनों के कारण जिन्होंने अपने पुत्रों को अपने भाइयों को अपने बेटों को तिलक लगाकर धर्म की रक्षा के लिए भेज दिया 

महाराज जी ने कहा जो राम राज का किला प्रभु भगवान दिखता है उसके न्यू में जनक परिवार की बेटी चुनी गई जब भगवान मां जानकी लक्ष्मण जी के साथ उनके लिए निकले पूरी अयोध्या मां कैकेई को धिक्कार देते हुए साथ चल पड़े यही तो अयोध्या वासियों का भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण है गुह और भगवान के मिलन महाराज श्री ने रामराज का आधार बताया जहां पर बड़े और छोटे में कोई भेद नहीं रामचरितमानस के सबसे रस भरे प्रसंग केवट प्रसंग को सुनाते हुए  महाराज जी ने कहा यदि परमात्मा से मिलन करना हो एकदम सरल सहज और भोले हो जाइए भोले भक्ति को परमात्मा बहुत पसंद करता है केवट भगवान से चरण धुलवा कर पार उतारने की बात करता है यही तो भक्त और भगवान के बीच का संबंध है केवट भगवान से अनेक तर्क करता है कि प्रभु मैं आपसे रोना इसलिए रोपा रहा हूं क्योंकि आप दयालु भक्तों के रुदन बर्दाश्त नहीं कर पाते इसलिए महाराज श्री ने बताया रूदन ही वह भक्ति मार्ग की साधना है जो भगवत मिलन करा देती है 

केवट की नाव से भगवान ने गंगा पार की और केवट को उतर आए देना चाहा लेकिन केवट ने मना कर दिया कि मैं बचने से विमुख नहीं हो सकता और भेज देना ही चाहते हो लौट कर जब आओगे तब भगवान तब दे देना जो दोगे हम ले लेंग केवल भगवान को गंगा पार करता है बहुत देना चाहते हैं लेकिन केवट ने कुछ नहीं लिया और जो भगवान से कभी नहीं लेता भगवान उसके ऋणी हो जाते हैं। 

आज मुख्य अतिथि के रूप में उतर प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर बृजेश सिंह जी, कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी, अखिल भारतीय प्रचारक भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूर्यकांत केलकर जी, राष्ट्रीय लोक दल के महासचिव त्रिलोक चन्द त्यागी जी, हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे इस  अवसर पर कथा आयोजक अजय त्यागी ने सबका आधार सत्कार किया अतिथियों का अंग वस्त्र पहनाकर प्रतीक चिह्न से सम्मान किया।

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