Saturday, June 27, 2026

महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु सात दिवसीय कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता कार्यशाला का शुभारंभ

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा जिला कारागार, मेरठ के अनुरोध पर 27 जून से 3 जुलाई तक आयोजित सात दिवसीय महिला कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता कार्यशाला का उद्घाटन सत्र संपन्न हुआ। कार्यशाला की रूपरेखा महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. बिंदु शर्मा के निर्देशन में तैयार की गई। 

कार्यक्रम का संयोजन महिला अध्ययन केंद्र की उप-समन्वयक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. वैशाली पाटील ने किया। इस अवसर पर डॉ. निधि, डॉ. रानू गर्ग, जेलर हरवंश पांडे, डिप्टी जेलर गीतिका भारद्वाज तथा योगाचार्य राखी सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा मेरठ महानगर की जिला उपाध्यक्ष पूजा बंसल ने महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने महिला अध्ययन केंद्र एवं जिला कारागार प्रशासन की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. वैशाली पाटील ने बताया कि सात दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत महिला बंदियों को खाद्य परिरक्षण (फूड प्रिजर्वेशन) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें अचार, मुरब्बा, जैम एवं अन्य खाद्य पदार्थों के वैज्ञानिक संरक्षण तथा पैकेजिंग की तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। इसका उद्देश्य महिला बंदियों को ऐसे कौशल प्रदान करना है, जिससे वे जेल से बाहर आने के बाद स्वरोजगार अथवा कुटीर उद्योग स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। जेलर हरवंश पांडे ने महिला बंदियों को पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण में भाग लेने तथा सीखी गई तकनीकों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। 

उन्होंने विश्वविद्यालय एवं महिला अध्ययन केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला बंदियों के पुनर्वास में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। कार्यशाला के अंतर्गत मानसिक तनाव प्रबंधन विषय पर योगाचार्य राखी सिंह द्वारा योग, प्राणायाम एवं ध्यान का विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने महिला बंदियों को तनावमुक्त जीवन, मानसिक संतुलन एवं सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए विभिन्न योगाभ्यास कराए। महिला अध्ययन केंद्र का मानना है कि कौशल विकास और मानसिक सशक्तिकरण के माध्यम से महिला बंदियों का प्रभावी पुनर्वास संभव है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित होकर नया जीवन प्रारंभ कर सकें। 

इस अवसर पर गृह विज्ञान विभाग की डॉ. निधि, हर्षिता एवं एंजेल ने महिला बंदियों को अचार निर्माण एवं उसकी पैकेजिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जिसमें सभी महिला बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में डिप्टी जेलर गीतिका भारद्वाज ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिला कारागार प्रशासन एवं विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त प्रयासों से भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी एवं पुनर्वासोन्मुखी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

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