Sunday, June 21, 2026

पिता पर कविता —सारिका भवालकर

 

नित्य संदेश 


"पिता" 

पिता होते परिवार का आधार 

रक्षा करते सदा ढाल बनकर 

भावनाएं नहीं हो पाती मुखर 

बाहर से दिखता वजूद कठोर 

उनके अंदर भी होती है 

ममता की बयार.

मजबूती से हाथ थाम कर

डिगने न देते कभी राह पर.

खुश होते बच्चों के लिए 

घोडा बनकर.

अपने अरमानों का कभी 

न करते ख्याल.

बच्चों के अरमान सदा पूरे हो 

रहता यही ख्याल.

दिन-रात मेहनत करते,

फिर भी माथे पर शिकन न लाते.



सारिका भवालकर

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