नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ एवं क्रीड़ा भारती के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर आयोजित सात दिवसीय योग शिविर के पांचवें दिन योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने उपस्थित साधकों को विभिन्न योग क्रियाओं, प्राणायामों तथा आयुर्वेद के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शिविर में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शहरवासियों ने सहभागिता की।
स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने महायोग क्रिया-1, महायोग क्रिया-2, कपोत उज्जायी प्राणायाम, खेचरी मुद्रा, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वज्रासन, वज्र संचलन, शशकासन, अर्धचंद्रासन, शलभासन, पवनमुक्तासन, नौका चालन तथा अन्य योगाभ्यास कराते हुए उनके लाभ बताए। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को संतुलित करने की संपूर्ण जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मन अत्यंत चंचल होता है, इसलिए उसे नियंत्रित करने के लिए निरंतर अभ्यास और वैराग्य आवश्यक है। योग और ध्यान से मन की एकाग्रता बढ़ती है तथा तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि सर्वांगासन, उज्जायी प्राणायाम तथा अन्य योगाभ्यास बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होते हैं। खेचरी मुद्रा के संबंध में उन्होंने कहा कि इसके नियमित अभ्यास से शरीर की ऊर्जा संरक्षित रहती है तथा साधक में संयम और आत्मनियंत्रण की क्षमता विकसित होती है। स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में योग और आयुर्वेद दोनों का विशेष महत्व है। आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की विज्ञानसम्मत प्रणाली है। उन्होंने कहा कि प्रकृति प्रदत्त औषधियों और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से अनेक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न रोगों के लिए परंपरागत आयुर्वेदिक योगों और जड़ी-बूटियों की जानकारी भी दी। मधुमेह के लिए उन्होंने गुड़मार, तेजपत्ता, विजयसार, इंद्रायण, गोरखदाना, ब्राह्मी, गिलोय तथा त्रिफला युक्त मिश्रण के उपयोग की चर्चा की। त्वचा एवं कुष्ठ रोगों के लिए विजयसार, खैर की छाल, शिरीष, अर्क, काकनासा, रोहिड़ा, सर्पगंधा, मुलेठी, पीपल तथा अर्जुन की छाल से बने पारंपरिक योग का उल्लेख किया। अवसाद एवं मानसिक तनाव की समस्या के लिए उन्होंने शतावरी, शंखपुष्पी, गोरखमुंडी, मुलहठी, मीठी कच तथा जयमाल के मिश्रण का उल्लेख करते हुए मानसिक संतुलन और सकारात्मक चिंतन पर विशेष बल दिया। ज्वर एवं मौसमी रोगों के लिए धनिया, गिलोय, तुलसी, पुष्करमूल, तालिसपत्र, अतीस, चिरायता और मुलेठी से तैयार काढ़े की जानकारी दी।
गर्भवती महिलाओं के लिए उन्होंने ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी, शतावरी, सफेद मूसली, गुलाब तथा छोटी इलायची से बने पारंपरिक पौष्टिक योग का उल्लेख करते हुए कहा कि गर्भावस्था में किसी भी औषधि का सेवन योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त शारीरिक दुर्बलता, स्वास्थ्यवर्धन, वीर्यवर्धन तथा अन्य समस्याओं के लिए अश्वगंधा, शतावरी, गोखरू, तालमखाना, मुलेठी, पुनर्नवा, अर्जुन तथा त्रिफला जैसी औषधियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग व्यक्ति की प्रकृति, आयु, रोग की अवस्था एवं चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही किया जाना चाहिए। योग और आयुर्वेद का समन्वय व्यक्ति को निरोगी, ऊर्जावान और संतुलित जीवन प्रदान करता है।
इस अवसर पर क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय महामंत्री राज चौधरी ने कहा कि योग भारत की ऐसी अमूल्य धरोहर है जिसे आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर में व्यापक स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि कोलकाता में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सहभागिता करेंगे। यह कार्यक्रम क्रीड़ा भारती के सहयोग और संचालन में आयोजित किया जा रहा है।
राज चौधरी ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी आधार है। योग व्यक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और सेवा भाव विकसित करता है। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ युवा ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं।
योग शिविर में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला प्रोफेसर मृदुल कुमार गुप्ता की अधिकारी रमेश चंद्र परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्णा यादव प्रोफेसर वीरपाल सिंह प्रोफेसर अनिल मलिक प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा प्रोफेसर प्रदीप चौधरी डॉक्टर सचिन कुमार डॉ अलका तिवारी डॉक्टर अनिल यादव डॉक्टर वैशाली पाटील वीनस शर्मा प्रवीण भड़ाना जगत सिंह दोसा राजन कुमार डॉक्टर संदीप त्यागी मनीष कुमार इंजीनियर मनीष मिश्रा आदि मौजूद रहे।



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