
सरकारी योजनाओं का झांसा देकर चुराते थे डेटा
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से अपने केंद्र पर आने वाले गरीब, सीधे-साधे और अनपढ़ लोगों को शिकार बनाता था। आरोपी इन लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे और धोखे से उनके असली दस्तावेज व फिंगरप्रिंट हासिल कर लेते थे। इसके बाद, उन असली कागजातों में डिजिटल हेरफेर करके बड़े पैमाने पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी तैयार की जाती थी।
अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के लिए खोलते थे बैंक खाते
इन जाली पहचान पत्रों के आधार पर आरोपी विभिन्न बैंकों में करंट और सेविंग्स अकाउंट खुलवाते थे। इन फर्जी खातों को अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सक्रिय साइबर ठगों को उपलब्ध कराया जाता था, ताकि देश-विदेश से ठगी गई अवैध रकम को सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर (रूट) किया जा सके।
छापेमारी में भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद
पुलिस ने जब इनके ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां से भारी मात्रा में अवैध डिजिटल किट और दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस को मौके से 180 फर्जी आधार कार्ड, 139 वोटर आईडी, 97 पैन कार्ड, 92 डेबिट व क्रेडिट कार्ड सहित कई बैंकों की पासबुक, चेकबुक और विभिन्न विभागों की फर्जी मोहरें मिली हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
एसपी क्राइम के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना (जालसाजी) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इन खातों के जरिए हुए करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन की कड़ियों को खंगाल रही है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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