नित्य संदेश
रहमत
कभी-कभी ऐसा भी होता है,
जहां उम्मीद न हो फूल खिलता है।
न समझे जिन्हें उगने के काबिल,
उस जगह फूलों का हजूम मिलता है।
कभी देखनी हो रब की "रहमत"
शबनम तो देखना
शहरा में भी गुल खिलता है।
चमन का क्या है,
हो जाए कहीं भी
बस हर काम सही वक्त पर होता है।
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आईना
मुझे मुझसे मिलाता,
मेरी हर अच्छाई, बुराई बताता,
मेरे आंसुओं पर रोता,
मेरी हंसी पर हंस जाता,
जो कह न सकूं किसी से,
वो झट से समझ जाता,
मेरा "आईना"
मुझसे हर हाल में वफा कर जाता।
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बेजुबान
न जाने क्या था मेरी आंखों में
वो रुक गया
मेरी बड़ी हथेली पर थम गया
न कुछ बोला न हिला
बहुत मोहब्बत से मुझे देखे गया
एक "बेजुबान"
अपनी चाहत में मुझे रंग गया।


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