Monday, June 22, 2026

मानवीय गरिमा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित 60वां विश्व संचार दिवस मनाया गया

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर 60वाँ विश्व संचार दिवस स्नेहालय, इंदौर में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सतप्रकाशन संचार केंद्र द्वारा कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ मध्य प्रदेश (सीबीएमपी) के संचार आयोग, सिग्निस एमपी एवं सीजी तथा आरवीए हिंदी के सहयोग से किया गया। इस सेमिनार-सह-कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 130 से अधिक पुरोहितों, धर्मबहनों, धर्मबंधुओं तथा युवाओं ने भाग लिया।


इस वर्ष के आयोजन का विषय “मैग्निफिका ह्यूमैनितास और मानवीय चेहरों एवं आवाज़ों का संरक्षण” था, जिसने प्रतिभागियों को मानवीय गरिमा, प्रामाणिक संचार तथा तीव्र गति से विकसित हो रही डिजिटल दुनिया की चुनौतियों पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पवित्र मिस्सा से हुआ, जिसकी अध्यक्षता भोपाल महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप परम श्रद्धेय डॉ. ए. ए. एस. दुरईराज, एसवीडी ने की। अपने उपदेश में उन्होंने वर्तमान समय में साहस और निर्भीकता की आवश्यकता पर बल दिया। विषय पर चिंतन करते हुए उन्होंने कहा कि आज मानवीय आवाज़ों को दबाया जा रहा है और सत्य के लिए खड़े होने वाले प्रामाणिक चेहरे कम होते जा रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रभावी संचार और आधुनिक तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से अपनी भविष्यद्रष्टा भूमिका को पुनः अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।


महाधर्माध्यक्ष दुरईराज ने कहा, “संचार मानव जीवन का एक अनिवार्य आयाम है। हमें इसे जीवंत और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समकालीन संचार साधनों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), को समझना होगा, जो आधुनिक समाज का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बदलते समय के लिए स्वयं को तैयार करने हेतु ऐसे सेमिनार अत्यंत आवश्यक हैं।”

सत्र का संचालन एआई प्रशिक्षण समन्वयक फा. बाबू कारकोंबिल, एसवीडी ने किया। उन्होंने मुख्य वक्ताओं फा. बिजू अलप्पाट, सचिव, सीबीसीआई संचार आयोग तथा फा. सिरिल विक्टर जोसेफ, सचिव, सीसीबीआई संचार आयोग का स्वागत किया।


अपने मुख्य व्याख्यान में फा. बिजू अलप्पाट ने नए धर्मपत्र मैग्निफिका ह्यूमैनिटास का व्यापक परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने इसके विभिन्न अध्यायों तथा उनके सामाजिक और पास्तोरल प्रभावों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ धार्मिक सीमाओं से परे जाकर संपूर्ण मानवता को संबोधित करता है।


उन्होंने कहा, “यह केवल कैथोलिकों के लिए लिखा गया दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि प्रत्येक मानव व्यक्ति के लिए एक सामाजिक दस्तावेज़ है, जो मानव गरिमा और मानवता के भविष्य से संबंधित है।”


दूसरे मुख्य सत्र में फा. सिरिल विक्टर जोसेफ ने पोप फ्रांसिस के विश्व संचार दिवस संदेश “मानवीय चेहरों और आवाज़ों का संरक्षण करें” पर विचार साझा किए। उन्होंने विश्व संचार दिवस के ऐतिहासिक विकास और वर्षों से इसके विभिन्न विषयों का अवलोकन प्रस्तुत किया। डिजिटल साक्षरता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमाओं से अवगत कराया तथा प्रामाणिक मानवीय संबंधों और संचार को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का संचालन श्री हरनीत सिंह ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को एआई तकनीकों का व्यावहारिक परिचय दिया तथा एआई की मूलभूत अवधारणाओं को समझाते हुए गूगल लैब्स, सुनो एआई और कैनवा सहित विभिन्न उपकरणों का प्रदर्शन किया। उन्होंने संचार और सेवाकार्य में इनके संभावित उपयोगों को भी स्पष्ट किया।


समापन सत्र में संचार आयोग ने संचार प्रेरिताई में उत्कृष्ट योगदान के लिए दो व्यक्तियों को सम्मानित किया। फा. क्लेरेंस श्राम्बिकल, एसवीडी को संचार मंत्रालय में 50 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवा के लिए सम्मानित किया गया, जबकि श्री सुमित धनराज को 15 वर्षों के उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। एक सप्ताह तक चले एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को भी प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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