Friday, June 26, 2026

श्रमिकों को 'मुसीबत में' योगी सरकार ने दिए 28 करोड़

• जिले में 1500 श्रमिकों और उनके आश्रितों को मिल चुका है योजना का लाभ

लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठउत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना राज्य के श्रमिकों और उनके आश्रितों के लिए एक बड़ा संबल बनकर उभरी है। इस योजना के तहत श्रमिकों को दिव्यांगता होने पर और मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है। जिले में अब तक 1500 श्रमिकों और उनके आश्रितों को इस योजना के तहत 28 करोड़ 25 लाख 74 हजार रूपये की आर्थिक मदद प्रदान की गई है।

निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को दुर्घटना से मृत्यु होने पर 5 लाख और सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यहीं नहीं श्रमिकों को दिव्यांगता होने पर भी प्रदेश सरकार की तरफ से मदद प्रदान की जा रही है ताकि इलाज के दौरान उन्हें आर्थिक संबल मिल सके। यदि कोई श्रमिक शत प्रतिशत दिव्यांग हो जाता है तो उस दशा में 4 लाख तथा 50 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता होने पर 3 लाख रूपये तक की आर्थिक मदद प्रदेश सरकार प्रदान कर रही है। 25 प्रतिशत दिव्यांगता के मामले में आर्थिक मदद की राशि दो लाख रूपये निर्धारित की गई है। प्रदेश सरकार के द्वारा इस योजना के तहत उन श्रमिकों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है, जो विभाग में पंजीकृत नहीं है। यदि किसी अंपजीकृत श्रमिक की कार्यस्थल पर मृत्यु हो जाती है तो उस दशा में उसके आश्रितों को एक लाख रूपये तथा सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

मेरठ जिले के उपश्रमायुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 598 श्रमिकों और उनके आश्रितों को इस योजना के तहत 6 करोड़, ़6 लाख, 25 हजार रूपये की धनराशि प्रदान की है। जबकि अभी तक योगी सरकार की ओर से जिले के 1500 श्रमिकों और उनके आश्रितों को 28 करोड़, 25 लाख, 74 हजार रूपये की आर्थिक मदद की जा चुकी है। पिछले दो महीने में दो श्रमिकों को इस योजना के तहत साढे़ चार लाख रूपये की आर्थिक मदद दी गई है। उपश्रमायुक्त राजेश मिश्रा का कहना है कि मुसीबत के समय में निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना श्रमिकों के लिए बड़ी राहत प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्माण कामगार श्रमिकों को पंजीकरण अवश्य कराना चाहिए।

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