मेरठ। माय भारत मेरठ के 5 दिवसीय अनुभव आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन बुधवार को युवा स्वयंसेवक एफ.सी.आई. परतापुर के गोदाम पहुँचे, जहाँ विपणन निरीक्षक एवं प्रेषण प्रभारी मुकेश कुमार ने उन्हें भंडारण, गुणवत्ता जाँच और फ्यूमिगेशन की विस्तृत प्रक्रिया से अवगत कराया।
युवाओं ने जाना कि गोदाम में अनाज का कोई भी नमूना आते ही सबसे पहले उसकी नमी यानी Moisture Content की जाँच होती है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है — पहले वॉल्यूम कप 'A' में नमूना भरा जाता है, फिर उस पर 275 पाउंड का दबाव डाला जाता है, स्केल पर 3:25 का संतुलन सुनिश्चित किया जाता है और मशीन स्वयं नमी का प्रतिशत बता देती है। त्रुटि कम करने के लिए कैलिपर और डिजिटल मॉइस्चर मीटर का भी उपयोग होता है। वॉल्यूम 'A' गेहूँ और चावल के लिए तथा वॉल्यूम 'B' दालों के लिए उपयोग में लाया जाता है। चावल में नमी की सीमा 15%, गेहूँ में 14% और धान में 17% निर्धारित है। इसके अलावा चावल की गुणवत्ता के लिए टूटे दानों की सीमा 25%, क्षतिग्रस्त दाने 3% और करनाल बंट 3% से अधिक नहीं होने चाहिए — इससे अधिक होने पर नमूना अस्वीकार कर दिया जाता है। चावल की विस्तृत जाँच में पहले अलगाव, फिर समान रूप से फैलाकर निरीक्षण, चारों ओर से 20 ग्राम नमूना लेना और तीन अलग-अलग आकार की छलनियों से छानने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
परतापुर में तीन गोदाम हैं, प्रत्येक की भंडारण क्षमता 3100 मीट्रिक टन है। गोदाम में अनाज को कीटों से बचाने के लिए ALP फ्यूमिगेशन की जाती है, जो प्रोफिलेक्टिक और क्योरेटिव — दो तरीकों से की जाती है। गौरी मेहता, केहकशा और मुकुल ने नमूना अस्वीकृति की प्रक्रिया, फ्यूमिगेशन के प्रभाव और गोदाम की क्षमता से जुड़े सवाल पूछे, जो इस कार्यक्रम में उनकी गहरी रुचि और समझ को दर्शाते हैं।

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