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Wednesday, May 6, 2026

सेना मेडल से सम्मानित कारगिल शहीद की पत्नी को मिला न्याय

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। विमलेश देवी निवासी रामनगर कैंट ने उच्च न्यायालय में अपने बच्चों को आर्मी के पार्ट 2 के आदेश के आधार पर स्कालरशिप आदि की सुविधा अपने 3 बच्चो दिलाये जाने हेतु उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। याची विमलेश देवी की तरफ से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश पड़िया के समक्ष बहस में बताया कि याची के पति सतीश कुमार वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय और रक्षक के दौरान कारगिल में शहीद हो गए थे। याची के कोई बच्चा नही हुआ था ।


इस पर सरकार ने याची के पति को सेना मेडल से भी सम्मानित किया था ।तत्पश्चात याची को पेंशन दिए जाने के आदेश में ही उसी परिवार में पुनर्विवाह किये जाने पर समस्त सुविधाओ का लाभ मिलने की बात पेंशन प्रपत्र में कही गई थी । समाज व आर्मी के अधिकारियों की मौजूदगी में याची ने अपने शहीद पति के सगे भाई (देवर)शिवकुमार से पुनर्विवाह भी किया जिसका सर्टिफिकेट दिनांक 9-2-2020 को आर्मी ने जारी किया और आर्मी ने दूसरे पति को भी भर्ती वर्ष 2000 में ट्रेनिंग में ले लिया था लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ही दूसरे पति ने आर्मी को छोड़ दिया ।दूसरे पति से 3 बच्चे हुए । याची की अधिवक्ता ने बहस में बताया कि दूसरे पति से तीन बच्चे पैदा हुए लेकिन आर्मी आफिसर अब इन बच्चों को शहिद के बच्चो को मिलने वाली सुबिधाये नही दे रहा ।जबकि इंडियन नेवी के ऑफिसियल वेबसाइट की गाइडलाइंस में स्पष्ट कहा गया है कि युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं के पुनर्विवाह के उपरांत भी उनके बच्चों को शैक्षिक रियायत दी जाएगी जबकि याची की बेटी की स्कालरशिप की राशि आर्मी विभाग ने नही दिया क्योकि याची ने दूसरी शादी से बचे पैदा हुए है उनके पिता शहीद सतीश कुमार नही है । 


याची अधिवक्ता सुनील चौधरी ने आगे बहस में बताया कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने निर्देश देवी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में आर्मी शहीद की विधवा पत्नी ने अपने जेठ के बच्चों को गोद लिए जाने पर उनके गोद लिए बच्चो को भी शहीद के बच्चों को दिए जाने वाली सुविधाओं को देने का आदेश पारित किया है। जबकि याची के अपने तीन बच्चे हैं जो कि उनके दूसरे पति(देवर)से पैदा हुए हैं और वर्तमान समय में दूसरे पति से विवाद भी चल रहा है। जिस पर उच्च न्यायालय ने आर्मी विभाग के संबंधित अधिकारी को याची के द्वारा दिये गए प्रत्यावेदन को 6 सप्ताह में तय करने का निर्देश जारी किया है।

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