नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मनोविज्ञान विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में बीडीएस इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी” का दूसरा एवं अंतिम दिन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में एम्स, नई दिल्ली से पधारे प्रो. गौरीशंकर एवं डॉ. अभिषेक बंगा ने पहले दिन की गतिविधियों का संक्षिप्त सार प्रस्तुत किया। इसके उपरांत उन्होंने कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी में प्रयुक्त प्रमुख कौशल एवं तकनीकों पर विस्तृत प्रकाश डाला। प्रतिभागियों को ऑटोमैटिक थॉट्स की पहचान, कॉग्निटिव डिस्टॉर्शन को समझना, एविडेंस फॉर एवं एविडेंस अगेंस्ट का विश्लेषण, वैकल्पिक विचार (अल्टरनेट थॉट) विकसित करना, थॉट रिकॉर्डिंग, बिहेवियरल एक्सपेरिमेंट्स तथा समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण कॉग्निटिव स्किल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अंतिम दो सत्रों में प्रतिभागियों ने “कॉग्निटिव रीस्ट्रक्चरिंग” की प्रक्रिया को गहराई से समझा और अभ्यास के माध्यम से अपने विचारों को पहचानने, उन्हें चुनौती देने तथा संतुलित और सकारात्मक वैकल्पिक विचार विकसित करने की तकनीकें सीखीं। साथ ही, विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम के समापन समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि डॉ. सम्यक जैन ने अपने संबोधन में कहा कि कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी एक विशेष वार्तालाप प्रदत्त थेरेपी है जो कि कई मानसिक बीमारियों में औषधीय उपचार से भी अधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है, इसलिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मूड डिसऑर्डर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, और यदि एक मनोवैज्ञानिक के रूप में हम अपने कॉग्निशन को नियंत्रित एवं प्रबंधित करना सीख लें, तो यह हमारी मनोवैज्ञानिक कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ दीर्घकालिक लाभ भी प्रदान करता है।
क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, प्रो. गौरीशंकर ने प्रतिभागियों की सक्रियता और लगन की सराहना करते हुए कहा कि एक उत्कृष्ट मनोवैज्ञानिक बनने के लिए आत्म-अवलोकन (सेल्फ ऑब्जर्वेशन) अत्यंत आवश्यक है। मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया की निदेशक डॉ. शिल्पी राजपूत ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की एवं बताया किवाया कार्यशाला प्रतिभागियों के लगन और पूरे समय सीखने और समझ की वजह से सफल हुई है। काउंसलर डॉ. अभिषेक बंगा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यशाला केवल सिखाने का मंच नहीं थी, बल्कि प्रतिभागियों की समर्पण भावना से उन्हें स्वयं भी बहुत कुछ सीखने को मिला।
अध्यक्षीय भाषण में बीडीएस इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के अध्यक्ष, अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की इस प्रकार की कार्यशालाओं की आवश्यकता शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी उतनी ही है। उन्होंने कहा कि मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के मनोवैज्ञानिकों को गांवों में जाकर भी बच्चों और अभिभावकों को सही परवरिश कैसे करें, एवं बच्चों को उनके मनोबल को बढ़ाने तथा सकारात्मक सोच विकसित करने के बारे में भी जागरूक करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए म्यूजिक थेरपी जैसी विधियों को वर्तमान समय में अत्यंत उपयोगी बताते हुए इनके व्यापक प्रसार पर बल दिया। काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट प्रिया पाल ने मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के उद्देश्यों एवं कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्रीमती नीतू सैनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट शिवानी शर्मा एवं मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया की मनोवैज्ञानिक सोफिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के सभी अतिथियों ने मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया तथा प्रो. संजय कुमार के प्रयासों की सराहना की और इस प्रकार की पहल को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। समापन अवसर पर मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के साथ सहयोग करने वाले शहर के मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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