Friday, May 15, 2026

एमसीयू में नाटक 'अनोखा वरदान' : सशक्त अभिनय और चुटीले संवादों ने खूब हंसाया

एमसीयू में दर्शकों ने खूब पसंद किया नाटक 'अनोखा वरदान

नित्य संदेश ब्यूरो 

‌      भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा अध्ययन व विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विद्यार्थियों ने 'अनोखा वरदान' नाटक का आकर्षक मंचन किया। विवि परिसर के मुक्ताकाश मंच पर निर्वाण नाट्य समूह की यह प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय रही।

इस अवसर पर अतिथि के रूप में उपस्थित प्रेमशंकर शुक्ला (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी-भारत भवन) ने विद्यार्थियों के अभिनय और प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी ने अभिनय, विषयवस्तु, प्रकाश और संगीत का सफल संयोजन किया,इसके लिए उन्होंने सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। 

ये रचनात्मक अभ्यास हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं- कुलगुरु

       आयोजन में विश्वविद्यालय के कुलगुरु मा. विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि ये रचनात्मक अभ्यास हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं । कुलगुरु ने इस जीवंत प्रस्तुति के लिए सभी को सफल आयोजन पर हार्दिक बधाई दी।  उन्होने कहा कि हम इस सत्र की समापन बेला में खडे है। सत्र का इससे बेहतर समापन नहीं हो सकता है।

        विभाग के प्रमुख डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभ्यास विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का हिस्सा है| विद्यार्थी यहाँ फिल्म के अतिरिक्त हर तरह की कला और माध्यमों के बारे में पढ़ते हैं । अभ्यास के तौर पर उस कलात्मक विधा को अपनाते भी हैं ।

क्या है कहानी

       नाटक में समाज की गरीबी-अमीरी को रेखांकित करते हुए मजेदार अंदाज में उस लोककथा को प्रस्तुत किया गया जिसमें भगवान श्री गणेश एक लालची अमीर सेठ का कान मंदिर से चिपका देते हैं क्योंकि उसने भविष्यवाणी सुन ली है कि एक सप्ताह में भिखारिन अमीर हो जाएगी...श्री गणेश कहते हैं कि जब तक ये सेठ गरीब भिखारिन को लाख रुपए नहीं दे देता है तब तक कान चिपका रहेगा. सेठ कहता है कान कटवा लूंगा पर भिखारिन को पैसा नहीं दूंगा..आखिरकार सेठानी पैसे लाकर देती है और भिखारिन मालामाल हो जाती है...नाटक को रोचक और प्रासंगिक संवादों के साथ बुना गया ।

       इस नाटक के लेखक - रेनू जैन, निर्देशक- ध्रुव आचार्य, सह निर्देशक- प्रमेय दुबे, नृत्य परिकल्पना- सृष्टि गांगुली और मुख्य अभिनय अथर्व सोनी-शिव, गुनगुन पांचाल-गणेश, लावण्या श्रीवास्तव-पार्वती, प्रमेय दुबे-सेठ, स्वास्तिक उपाध्याय-मुनीम, शिवि सिंह-सेठानी, वैष्णवी कुमारी-भिखारिन और आयुषी बोरकर-भिखारिन की बेटी का रहा।

        अन्य कलाकार साक्षी अग्रवाल, जानवी ओझा, स्मृति राज ,अंजली मारण ,सोनम, चिन्मोयी, उदय अस्थाना, विशाल मणि, ध्रुव आचार्य और अमन सेन रहे। संगीत में हारमोनियम-भावेश शर्मा, ढोलक-उदय अस्थाना, गायन-वृंदा, अश्लेषा सिसोदिया, आयुष श्रीवास्तव मंच के पीछे सहयोगी टीम में अरमान आर्य, अंश व्यास, द्वीप दत्ता, प्रियांशु ठाकुर, मेहनाज खान, मयंक यदुवंशी, ईशा गोस्वामी और टेक्निकल सहयोग प्रियांशु एवं दिव्यांशु ठाकुर का रहा।

विशेष सहयोगी डॉ.पवित्र श्रीवास्तव, डॉ. गजेंद्र अवास्या, डॉ. रामदीन त्यागी, अंकिता त्रिपाठी, मैथिली झा सहित चलचित्र एवं विज्ञापन विभाग के समस्त अध्यापक गण थे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और शिक्षक गण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।

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