Sunday, May 17, 2026

आखिरी उड़ान - एक लघुकथा

 

नित्य संदेश 

आखिरी उड़ान

​अपनी ही सोचों-परेशानियों में घिरा राजू खेत से लौट रहा था।

शाम हो चुकी थी।

​अचानक उसकी नज़र तभी आसमान पर दूर तक एक साथ जाती एक पट्टी पर पड़ी।

ये परिन्दों का एक समूह था।

परिंदे हमेशा समूह में चलते हैं और बड़े ही मनोरम दृश्य बनाते हैं।

राजू सब भूल उनकी खूबसूरती में जैसे गुम हो गया...

​सोचता, "सबसे अच्छी जिंदगी इनकी है। न सोने की फ़िक्र, न खाने की, न रहने की।"

​तभी उसकी नज़र एक परिंदे पर पड़ी, जो तेजी से नीचे की ओर आ रहा था और जब तक राजू कुछ समझ पाता, तब तक वो...

धरती पर आ गिरा।

​राजू तेजी से उसके पास पहुंचा।

उसके पंखों से खून निकल रहा था।

राजू ने उसके पास जाने की कोशिश की, वो तेजी से फड़फड़ाया और शायद दर्द से उसकी चोंच में से कुछ गिरा।

​उसने ऐसे देखा जैसे अभी हमला कर देगा।

उसने राजू को देखते हुए, पंखों को हिलाया, अजीब से रंग आंखों में आए—शायद दर्द।

​उसने फिर कोशिश की, दाना मुंह में उठा लिया।

शायद ये खाना उसके बच्चों के लिए होगा।

फिर बहुत तेजी से पंखों को फड़फड़ाया, जैसे पूरी ताकत लगा दी।

और अब, आसमान में एक तरफ गायब हो गया।

​"एक कबूतर इतना साहसी है..." तो मैं? सोचता राजू शांत मन से मुस्कुरा कर घर की ओर तेजी से चल दिया।




अफजल मुहम्मद

लेखक -इंजीनियर शिक्षक



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