नित्य संदेश। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध से उत्पन्न हुई वैश्विक समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री जी ने विदेशीमुद्रा बचाने के लिए सचेत करते हुए जो कहा विपक्ष ने बिना सोचे समझे विरोध करना शुरू कर दिया। समूचा विश्व इस समय तेल और गैस के संकट से जूझ रहा है। क्रूड आयल के दाम बढ़ने से मंहगाई बढ़ने लगी है। इन चीजों के आयात महंगा होने से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
रुपये का अवमूल्यन होने से विदेशी मुद्रा भंडार में कमी हो रही है, और यह केवल भारत की ही नहीं सभी देशों की समस्या है। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री जी जनता को आने वाले समय के लिए सावधान करना चाहते हैं तो हम सबको उस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। लेकिन विपक्ष का रोना है कि यह सब भाजपा के कुशासन की देन है, सही नहीं है। उन्होंने तो केवल चेताया है कि एक साल के लिए सोना मत खरीदो, विदेश यात्रा मत करो, सरकारी परिवहन में सफर करो आदि। किसी को बाध्य तो नहीं किया इसके लिए। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि सोना, पैट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, उर्वरक, विदेश यात्रा इनमें देश में संचित विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च होता है।
घर का मुखिया भी तो परिवार के सदस्यों को, आने वाले जोखिमों के लिए आगाह करता है। खाप, समुदायों के मुखिया भी समय-समय पर अपने लोगों को निर्देश जारी करके अच्छे और बुरे का बोध कराते हैं। विभिन्न मतों के धर्म गुरु भी धार्मिक सभाओं/आयोजनों में प्रवचन, तकरीर और फतवें के द्वारा लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। प्रधानमंत्री जी भी तो वही कर रहे हैं। इसमें विपक्ष को सकारात्मक भाव रखना चाहिए।

लेखक
महेंद्र कुमार रस्तौगी
(अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति कंकरखेड़ा, मेरठ)

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