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Tuesday, May 5, 2026

वैदिक उपाख्यान और ऋषिकवियों की कल्पनाओं का वर्णन किया

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कथाव्यास प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी ने मयूर विहार में अपने आवास पर सामवेद की षष्ठ कथा में सामवेद में वर्णित पुनर्जन्म की प्रक्रिया को समझाया।


अग्नि का नाती है तापक्रम

आज की कथा में वैदिक उपाख्यान और ऋषिकवियों की कल्पनाओं का वर्णन हुआ। वस्तुत: ये द्युलोक में सोमराजा की पर्जन्य से शिशुजन्म तक की यात्रा का वर्णन है। आज की कथा का प्रारम्भ हुआ अग्नि की स्तुति से। अग्नि का पुत्र ऊर्जा, ऊर्जा का पुत्र तापमान अर्थात् अग्नि का नाती तापमान। मन्त्र में प्रयुक्त सभी विशेषण तापक्रम में मिलते हैं, जो सृष्टि का आधार है। तापक्रम अरति, अध्वर, विश्वदूत और अमृत है।


उषा सूनरी है - सूर्य को जन्म देने वाली है। द्युलोक की पुत्री है। यहाँ सोम और अग्नि का सम्बन्ध दिखाया गया है। मृत्यु के समय मिथुनभंग में सबसे पहले अग्नि अलग होता है और जन्म के समय अग्नि सबसे पहले आता है और सोम उसमें मिलता है। जिस प्रकार दूर यात्रा करने वाले पक्षी हंस, बगुला अकेले नहीं उड़ते उसी प्रकार जीव कभी अकेले नहीं चलते। मृत्यु से पहले ही व्यक्ति का इन्द्र तय कर लेता है कि कहाँ जन्म लेना है। उद्यम, आराधना और कर्त्तव्यपालन करने वाला ही अधिकारी है, श्वान के समान हर जगह जीभ लपलपाने वाले, हर कहीं आकर्षित होने वाले नहीं।

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