Wednesday, May 13, 2026

हरियाणा के राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल का अन्वेषण किया



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित इतिहास विभाग के पुरातत्व के विद्यार्थियों व शोधार्थियों ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल का अन्वेषण किया। राखीगढ़ी हडप्पा संस्कृति/ सिंधु सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्त्विक स्थल है, जो वेदों में उल्लेखित सरस्वती की एक सहायक नदी दृषद्वती के किनारे पर स्थित है। वर्तमान में यह नदी शुष्क अवस्था में है। दो आधुनिक गांवों राखी शाहपुर और राखी खास के अंतर्गत स्थित है। इसे हड़प्पा संस्कृति के प्रमुख महानगरीय केंद के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 


वर्ष 1969 में प्रो. सूरज मान द्वारा किए गए उत्खनन से यह ज्ञात हुआ कि राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेष और बस्तियाँ हड़प्पा सस्कृति की प्रकृति की है। डॉ अमरेंद्र नाथ द्वारा यहां पुनः पुरातात्विक उत्खनन शुरू हुआ जिसमें पुरातात्विक अवशेष एवं मृदभांड प्राप्त हुए जो कि राखीगढ़ी की ऐतिहासिक महत्ता को प्रकट करते हैं। वर्ष 2006 में पुनः प्रोफेसर वसंत शिंदे द्वारा राखीगढ़ी में उत्खनन पुनः प्रारंभ हुआ व मुख्यतः टीला संख्या 7 पर उत्खनन किया जिसमें उन्हें मिले महिला कंकाल के डीएनए के आधार पर ये जानकारी प्राप्त होती है कि आर्य भारतीय मूल के थे।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं दक्कन कॉलेज पुणे द्वारा किए गए बाद के अन्वेषणों और उत्खनन में पता चला कि यहां एक बस्ती थी और 500 हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में फैली हुई थी, इनमें ग्यारह अलग-अलग टीले शामिल हैं जिन्हें क्रमशः RGR से लेकर RGR-XI नाम दिया गया है। ये बस्तियाँ वैदिक सरस्वती की सहायक नदियों में से एक दृषद्वती के पास स्थित थी, जिसे आधुनिक चौतांग नदी से पहचाना जाता है। 



भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा डॉ० अमरेन्द्र नाथ के निर्देशन में सन 1997-98 से 1999-2000ई तक किये गये उत्खननों के परिणाम स्वरूप विभिन्न स्तरों से प्राप्त कार्बन तिथियों के आधार पर यहां ई० पूर्व 5 वीं सहस्राब्दी से ई० पूर्व ३ री सहस्राब्दी तक के समकालिक प्रारंभिक पूर्व चरण से परिपक्च हडप्पा काल तक के विभिन्न बसाबटो का पता चला। यहाँ से उन्हें यज्ञ वेदियां भी प्राप्त हुई थीं। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राखीगढ़ी में टीला संख्या 1,3,4,7 का अन्वेषण किया। 


राखीगढ़ी में मौजूद डॉ. अप्पू सिंह सहरन जी ने विद्यार्थियों को वर्तमान में चल रहे उत्खनन व उत्खनित क्षेत्र के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की तथा उत्खनन की बारीकियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। यहां विद्यार्थियों ने क्षैतिज उत्खनन, स्तरीकरण व प्रलेखन को समझा। राखीगढ़ी में स्थित संग्रहालय में लघु चलचित्र प्रदर्शनी तथा 3D मॉडल के माध्यम से संपूर्ण राखीगढ़ी क्षेत्र तथा वहां रखे प्राचीन हड़प्पा कलाकृतियों का अवलोकन किया। 



इतिहास विभाग द्वारा की गई इस पहल से विद्यार्थियों व शोधार्थियों को पुरातत्व के अंतर्गत शोध के नए अवसर प्राप्त होंगे। इतिहास विभाग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पुरातात्विक स्थल सिनौली व राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेषों पर अध्ययन करेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिनौली के अतिरिक्त अन्य हड़प्पा सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थलों की खोज का कार्य भी इतिहास विभाग द्वारा किया जाएगा। भविष्य में इतिहास विभाग भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति लेकर अपने विद्यार्थियों व शोधार्थियों के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के उत्खनन का प्रयास भी करेगा। इस भ्रमण में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कृष्ण कान्त शर्मा, प्रोफेसर अराधना, डॉ मनीषा, सुश्री प्रज्ञा माहेश्वरी, एम. ए. आर्कियोलॉजी के विद्यार्थी व प्री- पी एच डी. के शोधार्थी सम्मिलित हुए।

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