नित्य संदेश
तस्वीरें बोलती हैं ...
हाँ तस्वीरें बोलती हैं ...
कभी पुरानी तस्वीरें निकालकर गौर से देखना उन्हें,
वो कहती हैं उस पल को ... जब उसे कैमरे में कैद
किया गया था।
वो खुशियाँ, थोड़े गम, वो यादें, उससे जुड़े किस्से
वो माहौल, वो अपने ...
हाँ वो अपने जो कुछ साथ हैं कुछ जो दुनिया को
विदा कह गए,
कुछ जो समय के साथ बड़े हो गए,
कुछ जो पीछे छूट गए ... और कुछ वो रिश्ते जो
टूट गए।
रिश्ते ... जो टूट गए ... कुछ नया पाने की चाह में ...
कुछ अपने जो अपनों की खुशी उनका सुख नहीं देख पाए,
आज पराये हैं ... और मग्न हैं अपनी नई दुनिया,
अपने नए रिश्तों में, नई यादों के साथ, नई खुशियों
नए गमों नए किस्सों के साथ ...
अपनी नई तस्वीरों के साथ ...
सच, तस्वीरें कितना बोलती है ...
— वर्षा प्रतीक व्यास
लेखिका कुशल गृह प्रबंधक हैं


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